New Delhi News: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चालकों को लेन अनुशासन और ट्रैफिक नियमों की साइंटिफिक ट्रेनिंग देना जरूरी है। देश में हर साल हादसों में करीब 1.8 लाख लोगों की जान जाती है। उन्होंने बताया कि इन मौतों के पीछे इंसानी व्यवहार सबसे बड़ा कारण है।
गडकरी राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब दे रहे थे। मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने अच्छी सड़कों के बावजूद बढ़ते हादसों पर सवाल उठाया था। उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए टेस्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांग की, ताकि बिना योग्यता के गलत तरीकों से लाइसेंस लेने वालों पर रोक लग सके।
हाइवे पर टोल टैक्स वसूलने के फैसले का गडकरी ने किया बचाव
द्रमुक सदस्य पी. विल्सन द्वारा टोल वसूली पर सवाल उठाने पर गडकरी ने कहा कि सरकार हर सेवा मुफ्त नहीं दे सकती। अगर लोगों को विश्वस्तरीय सड़कें और अच्छी सेवाएं चाहिए तो भुगतान करना होगा। उन्होंने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे यात्रा का समय नौ घंटे से घटकर सवा दो घंटे रह गया है।
मंत्री ने बताया कि टोल से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल पूर्वोत्तर राज्यों में 5 लाख करोड़ रुपये की लागत से सड़कें बनाने में हो रहा है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में 2 लाख करोड़ रुपये की सुरंग परियोजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि बजटीय सीमाओं के कारण टोल लेना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि बुनियादी ढांचे का विकास न रुके।
राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने गडकरी से पूर्व सांसदों को भी टोल प्लाजा पर मुफ्त पास देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पूर्व सांसदों को रेलवे की तरह टोल में भी छूट मिलनी चाहिए। गडकरी ने आश्वासन दिया कि उनका मंत्रालय इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करेगा और सदन को इसकी जानकारी देगा।