भारत में रबी सीजन के दौरान एक एकड़ सरसों की खेती से किसान कैसे प्राप्त कर सकते हैं बंपर पैदावार और मोटा मुनाफा

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Jaipur News: भारत में रबी सीजन के दौरान सरसों की खेती किसानों के लिए एक बहुत ही कम लागत और कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। इसमें दानों के साथ-साथ तेल और खल का उत्पादन भी होता है, जिनकी मार्केट में पूरे साल भारी डिमांड बनी रहती है।

एक एकड़ खेत में सरसों और तेल का कुल उत्पादन

अगर किसान अपने एक एकड़ खेत में सरसों की उन्नत किस्मों की बिजाई करते हैं, तो उन्हें आसानी से 8 से 10 क्विंटल तक की पैदावार मिल सकती है। सरसों के दानों में लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक तेल मौजूद होता है। इस वजह से 10 क्विंटल सरसों की पेराई कराने पर करीब 350 से 400 लीटर शुद्ध तेल प्राप्त होता है।

तेल निकालने के बाद जो 60 प्रतिशत हिस्सा बच जाता है, उसे हम खल कहते हैं। 10 क्विंटल सरसों से लगभग 600 किलोग्राम खल तैयार होती है। डेयरी फार्मिंग और पशु आहार में खल की बहुत अधिक मांग रहती है। इससे किसानों को अतिरिक्त कमाई का एक मजबूत जरिया मिल जाता है और उनकी आय काफी बढ़ जाती है।

सरसों के तेल और खल से होने वाली कुल कमाई

यदि किसान 350 लीटर सरसों का तेल एफएमसीजी कंपनियों, लोकल ब्रांड्स या खुद की पैकेजिंग करके 140 से 150 रुपये प्रति लीटर में बेचते हैं, तो उन्हें केवल तेल से ही 50,000 रुपये की कमाई होगी। इसके साथ ही 600 किलो खल को 25 से 30 रुपये प्रति किलो बेचने पर 15,000 से 18,000 रुपये अतिरिक्त प्राप्त हो जाएंगे।

इस तरह सरसों के तेल और खल को बेचकर कुल कमाई लगभग 65,000 से 68,000 रुपये हो सकती है। इसमें से खेत की तैयारी, बीज, सिंचाई और पेराई में लगने वाली 18,000 से 20,000 रुपये की लागत निकालने के बाद किसान को 45,000 से 50,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा मिल सकता है। हालांकि यह फायदा तेल के बाजार भाव पर निर्भर करता है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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