Delhi News: दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचे। दोनों नेताओं ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। सिसोदिया ने कहा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट की मांग किसी ने नहीं की थी।
आप नेता मनीष सिसोदिया ने मांग की कि सरकार को धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक शिक्षा मंत्री को अपने पद से हट जाना चाहिए। अगर वे निर्दोष हैं तो उन्हें क्लीन चिट मिलने के बाद पद वापस मिलना चाहिए, वरना कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार से बातचीत से पहले इस्तीफा जारी करे केंद्र
केंद्र सरकार द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को दिए गए बातचीत के प्रस्ताव पर सिसोदिया ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सोशल मीडिया पर यह पोस्ट करना चाहिए कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद ही सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों से किसी तरह की चर्चा शुरू करनी चाहिए।
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि 2024 के नीट-यूजी पेपर लीक के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया को बचाने की कोशिश की जा रही है। बिहार पुलिस की शुरुआती एफआईआर में नाम होने के बावजूद सीबीआई को उसके खिलाफ सबूत नहीं मिले। उन्होंने कहा कि सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल न करना कई बड़े सवाल खड़े करता है।
बिना इस्तीफे बातचीत का कोई मतलब नहीं: सौरभ भारद्वाज
सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट कहा कि जब मुख्य मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की है, तो बातचीत की कोई आवश्यकता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई संवाद के लिए गंभीर है तो उन्हें सीधे संपर्क करना चाहिए। सार्वजनिक रूप से बयान देने का अर्थ है कि सरकार समाधान के प्रति गंभीर नहीं है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कहा है कि नीट विवाद पर बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने चर्चा के लिए चार प्रस्ताव भेजे हैं। वहीं सीजेपी का कहना है कि उसे अभी तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है, लेकिन वह तटस्थ स्थल पर वार्ता के लिए तैयार है।