Delhi News: देश भर में जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा से ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित करा लिया। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने इस पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसे अधूरा कदम करार दिया है।
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि बिल में केवल पेपर लीक होने के बाद की सजा और जुर्माने पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक पेपर लीक को रोकने के बुनियादी उपाय नहीं किए जाएंगे, तब तक इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
एनटीए में सुधार और वेंडरों की डिजिटल ऑडिट जरूरी: आशुतोष रांका
आशुतोष रांका ने मांग उठाई कि जब तक एनटीए (NTA) में सुधार, एसएससी को वैधानिक दर्जा और एग्जाम कैलेंडर में पारदर्शिता नहीं लाई जाएगी, तब तक सुधार अधूरा रहेगा। उन्होंने कोचिंग संस्थानों और ब्लैकलिस्टेड वेंडरों पर रोक लगाने के साथ पूरे ढांचे का डिजिटल और फिजिकल ऑडिट कराने पर जोर दिया।
सीजेपी प्रवक्ता ने सरकार को सलाह दी कि देश के बच्चों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसले न लिए जाएं। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी संबंधित विशेषज्ञों और छात्र प्रतिनिधियों से बात करके ही पेपर लीक को रोकने के ठोस इंतजाम किए जाने चाहिए।
विधेयक में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान
सदन में जोरदार हंगामे के बीच यह विधेयक ध्वनिमत से पास हो गया। इस नए कानून के तहत पेपर लीक या अनुचित साधनों के प्रयोग पर 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं संगठित अपराध के मामलों में 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
कानून के तहत जांच को दो महीने के भीतर पूरा करना होगा और त्वरित अदालतों (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में तीन महीने के अंदर सुनवाई संपन्न की जाएगी। दूसरी ओर, सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का भी गठन किया है।