उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर घटाएगा गोरखपुर का मॉडल, एकीकृत स्वास्थ्य पहल से मिले सकारात्मक परिणाम

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Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए गोरखपुर का नया मॉडल बेहद कारगर साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग की पहल पर आशा-एएनएम से लेकर एम्स के विशेषज्ञों तक के बेहतर समन्वय से जिले में मातृ मृत्यु दर पर अंकुश लगाने में बड़ी सफलता मिली है।

सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में मातृ मृत्यु दर बढ़कर 154 हो गई है, जो दो साल पहले 141 थी। इस स्थिति के बीच गोरखपुर में गांव के अस्पतालों, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स को जोड़कर ‘मातृ सेवा अभियान’ चलाया जा रहा है। इस एकीकृत टीम में डॉक्टर, नर्स और मॉनिटरिंग स्टाफ शामिल हैं।

सवा महीने तक नहीं हुई कोई मौत, उच्च जोखिम मामलों पर विशेष नजर

सीएमओ डॉ. राजेश झा के अनुसार, 21 मई से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत 12 जुलाई तक सवा महीने के दौरान जिले में प्रसव के दौरान एक भी महिला की मौत नहीं हुई है। इस अवधि में 271 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं को विभिन्न अस्पतालों में सुरक्षित रेफर कर इलाज मुहैया कराया गया।

इन मामलों में 40 महिलाएं अत्यधिक रक्तस्राव, 35 गंभीर एनीमिया, 21 उच्च रक्तचाप और 32 महिलाएं उल्टे शिशु की समस्या से पीड़ित थीं। अत्यंत कम हीमोग्लोबिन वाली महिलाओं को भी बेहतर तालमेल के जरिए बचा लिया गया। जिले के 18 ब्लॉकों से रेफरल मिल रहे हैं और सहजनवा सीएचसी में सफल डिलीवरी हो रही है।

व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल तकनीक से हर घंटे की जा रही निगरानी

नौवें महीने में गर्भवती के अस्पताल पहुंचते ही हाई-रिस्क मामलों की पहचान की जाती है। गंभीर स्थिति वाली महिलाओं को तुरंत हायर सेंटर रेफर किया जाता है। रेफरल पर्चे और मरीज के स्वास्थ्य मापदंडों जैसे बीपी, शुगर, हीमोग्लोबिन की जानकारी मातृ सेवा टीम के व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा की जाती है।

इसके बाद कंट्रोल रूम से टीम हर एक घंटे पर मरीज का फॉलोअप लेती है। इतना ही नहीं, सुरक्षित प्रसव के बाद भी 7 से लेकर 42 दिनों तक प्रसूता का नियमित फॉलोअप किया जाता है। इससे प्रसव के बाद होने वाली संभावित जटिलताओं और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को समय रहते रोका जा रहा है।

प्राइवेट अस्पतालों को ट्रेनिंग, शासन को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

स्वास्थ्य विभाग अब इस अभियान में निजी अस्पतालों को भी जोड़ रहा है, जहां के स्टाफ को हाई-रिस्क डिलीवरी के प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। दो महीने का समय पूरा होने के बाद इस पूरे सिस्टम का मूल्यांकन कर कमियों को दूर किया जा रहा है।

मातृ सेवा अभियान के इस ट्रायल की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस गोरखपुर मॉडल को पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाए, तो यह राज्य में मातृ मृत्यु दर को कम करने का एक बेहद कारगर हथियार साबित होगा।

Desh Raj
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