Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण को लेकर बड़ी बात कही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ईडब्ल्यूएस कोटे के लिए 8 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा प्रथम दृष्टया सही लगती है। यह टिप्पणी एनटीए की 2021 की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह याचिका मेडिकल कोर्स में अखिल भारतीय कोटा (AIQ) के तहत ओबीसी को 27 फीसदी और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण देने के खिलाफ दायर की गई है। कोर्ट ने कहा कि जनहित अभियान मामले में भी 103वें संविधान संशोधन को सही ठहराया गया था।
पांडे कमीशन की सिफारिशों पर चर्चा, अगले हफ्ते होगी विस्तृत सुनवाई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की वकील तन्वी दुबे ने पांडे कमीशन की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आयोग ने 8 लाख रुपये की सीमा का समर्थन किया था, लेकिन 5 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि वाले परिवारों को बाहर रखने की सिफारिश की थी। मुख्य वकीलों की अनुपस्थिति के कारण मामले को एक हफ्ते के लिए स्थगित कर दिया गया है।
अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील को संबंधित मुद्दों की सूची बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से भी इस मामले में मदद मांगी गई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि 8 लाख रुपये के मानदंड की अंतिम वैधता याचिकाओं पर आने वाले फैसले पर निर्भर करेगी।
नीट यूजी 2026 काउंसिलिंग के नियमों में बड़ा बदलाव, छात्रों को राहत
दूसरी तरफ, नीट-यूजी 2026 की काउंसिलिंग में छात्रों की सुविधा के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब सीट अपग्रेडेशन का विकल्प चुनने वाले उम्मीदवारों को कॉलेज जाकर व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी। उनकी सीट प्रणाली में सुरक्षित रहेगी और वे अगले दौर में हिस्सा ले सकेंगे।
इसके अलावा उम्मीदवारों को काउंसलिंग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ही सीट छोड़ने की सुविधा भी दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और पूरी तरह से मेधा (मेरिट) पर आधारित बनाया जाए।