Delhi News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई हालिया हिंसा के आरोपियों को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस अब गूगल की मदद लेगी। शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक डिजिटल टूलकिट और विदेशी फंडिंग का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
तकनीकी सबूतों के आधार पर पुलिस को शक है कि प्रदर्शनकारी और छात्र केवल चेहरा थे। असली मास्टरमाइंड सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए पीछे से साजिश रच रहे थे। इन उपद्रवी तत्वों ने ही भीड़ जुटाने और प्रदर्शन को हिंसक बनाने का पूरा प्लान तैयार किया था।
टूलकिट और मुख्य साजिशकर्ता की तलाश में जुटी पुलिस
जांच एजेंसियों का मुख्य सवाल यह है कि यह टूलकिट किसने बनाया और इसे कहां से अपलोड किया गया। पुलिस अब गूगल से टूलकिट बनाने वाले का आईपी एड्रेस, लॉग-इन क्रेडेंशियल्स और लोकेशन डेटा मांगेगी। पुलिस का मानना है कि इस डेटा से मुख्य आरोपी की पहचान आसानी से हो जाएगी।
पकड़े जाने के डर से संदिग्धों ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डेटा और चैट मिटा दिए थे। इन मिटाए गए मैसेज और ग्रुप चैट्स को रिकवर करने के लिए फॉरेंसिक और आधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। डिजिटल फॉरेंसिक टीम कॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
हिंसा के मामले में एफआईआर की संख्या हुई 11
टॉलस्टॉय मार्ग पर हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक और एफआईआर दर्ज की है। इस घटना में दो एसीपी सहित कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हुए थे। अब तक इस पूरे मामले से जुड़ी एफआईआर की कुल संख्या बढ़कर 11 तक पहुंच चुकी है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हिंसा केवल छात्रों के गुस्से का नतीजा नहीं थी। भीड़ में कुछ असामाजिक तत्व और हिस्ट्रीशीटर बदमाश भी शामिल थे। वीडियो फुटेज में उत्तर-पूर्वी दिल्ली का एक हिस्ट्रीशीटर पहचान छिपाने की कोशिश करते हुए नारेबाजी करता दिखाई दिया है।