Delhi News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक मामले में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर 25 वर्षीय महिला पर जीरो एफआईआर दर्ज हुई है। इस घटना के बाद देश में कानूनी बहस तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की मदद से जांच एजेंसियों ने आरोपी महिला की पहचान की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों के आधार पर की जाएगी। इस घटना ने भारतीय न्याय संहिता के तहत अभद्र टिप्पणी से जुड़े कानूनी नियमों पर सभी का ध्यान खींचा है।
शांति भंग करने के उद्देश्य से जानबूझकर किया गया अपमान
भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 के तहत जानबूझकर किसी का अपमान करने पर कार्रवाई होती है। यह कानून तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति सामने वाले को उकसाकर शांति भंग करने या अपराध कराने का प्रयास करता है। इसका मकसद केवल अपशब्दों को रोकना नहीं, बल्कि हिंसा और अशांति की मंशा को रोकना है।
अदालत में धारा 352 के तहत दोष सिद्ध होने पर दोषी को अधिकतम 2 साल की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मामले में कार्रवाई करने से पहले टिप्पणी का उद्देश्य, माहौल और उससे पैदा हुई परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही आगे का फैसला लिया जाता है।
गाली-गलौज के साथ धमकी देने और मानहानि पर क्या हैं नियम
यदि अपमानजनक भाषा के साथ किसी की जान, संपत्ति या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाए, तो धारा 351 लागू होती है। सामान्य धमकी के मामलों में 2 साल की जेल होती है, जबकि गंभीर मामलों में 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। झूठे आरोपों से सम्मान को ठेस पहुंचाने पर धारा 356 लगती है।
यदि किसी महिला की गरिमा या शील को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से अपमानजनक शब्द या इशारे किए जाते हैं, तो बीएनएस की धारा 79 के तहत मामला दर्ज होता है। यह धारा पुरानी आईपीसी की धारा 509 की जगह लाई गई है। बीएनएस में केवल गाली देने पर कोई अलग से स्वतः अपराध का नियम नहीं है।