प्रधानमंत्री मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाने पर केंद्र सख्त, मेटा अधिकारियों से पूछे तीखे सवाल

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New Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने मेटा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स चीफ जोएल कैपलन के नेतृत्व में आई टीम से तीखे सवाल पूछे हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों से सीधी जवाबदेही तय करने को कहा है।

केंद्रीय मंत्री ने मेटा से पूछे गंभीर सवाल

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेटा की टीम से पूछा कि क्या उन्होंने ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए पैसे लिए जिससे अशांति फैल सकती है। सूत्रों के मुताबिक मेटा अधिकारियों ने माना कि उनके सिस्टम अवैध कंटेंट और डीपफेक को रोकने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं।

सरकार ने सेफ हार्बर स्टेटस पर दिया कड़ा संदेश

उच्चस्तरीय बैठक में भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि मेटा को अब केवल एक मध्यस्थ नहीं माना जा सकता। कंपनी खुद तय करती है कि कौन सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा, इसलिए उसकी जवाबदेही बनती है। बैठक में प्रधानमंत्री का वीडियो पोस्ट हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।

संसदीय समिति ने तीन दिन में मांगी माफी

संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने मेटा के सीईओ से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। समिति ने चेतावनी दी है कि माफी न मांगने पर कंपनी को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (सेफ हार्बर) वापस लेने की सिफारिश की जा सकती है।

क्या है आईटी एक्ट की धारा 79(3)?

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा मिलती है। इसके तहत यूजर द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म जिम्मेदार नहीं होते। लेकिन सरकारी आदेश न मानने या अवैध कंटेंट न हटाने पर धारा 79(3) के तहत यह सुरक्षा खत्म की जा सकती है।

Desh Raj
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