Mumbai News: गजनी जैसी फिल्मों में शानदार एक्टिंग के लिए मशहूर दिग्गज एक्टर प्रदीप रावत का बीते मंगलवार शाम करीब छह बजे निधन हो गया। वे 74 साल के थे। कैंसर का इलाज चल रहा था। पहले उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए भिवंडी के एक खास कैंसर अस्पताल में शिफ्ट किया गया। वहां उनका निधन हो गया।
उनके निधन ने सेहत से जुड़े एक अहम सवाल की ओर ध्यान खींचा है। क्या उम्र बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। बढ़ती उम्र कई तरह के कैंसर के लिए सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है। लेकिन ऑन्कोलॉजिस्ट इस बात पर जोर देते हैं कि सिर्फ उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को यह बीमारी होगी ही।
ब्लड कैंसर एक गंभीर बीमारी है। यह शरीर के खून बोन मैरो और लिम्फेटिक सिस्टम पर सीधा प्रभाव डालती है। यह बीमारी धीरे धीरे भी बढ़ सकती है। कुछ मामलों में बहुत तेजी से फैलती है। इसलिए समय पर इसकी पहचान और इलाज बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग ब्लड कैंसर की चपेट में आते हैं।
अनुमान है कि हर साल एक लाख से अधिक नए मरीज सामने आते हैं। जबकि लगभग सत्तर हजार लोगों की इस बीमारी के कारण मौत हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और शुरुआती जांच से इलाज के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। ब्लड कैंसर ऐसी बीमारियों का समूह है जिसमें शरीर की रक्त कोशिकाएं सामान्य तरीके से काम करना बंद कर देती हैं।
ब्लड कैंसर के मुख्य प्रकार क्या हैं
इसका असर खून बनाने वाली कोशिकाओं बोन मैरो और लिम्फेटिक सिस्टम पर पड़ता है। बीमारी बढ़ने पर शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता भी कमजोर होने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड कैंसर तीन प्रकार का होता है। ल्यूकेमिया में बोन मैरो असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं बनाना शुरू कर देता है। इससे सामान्य रक्त कोशिकाओं का काम प्रभावित होने लगता है।
लिम्फोमा यह कैंसर लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित करता है। यह शरीर की इम्यूनिटी का अहम हिस्सा होता है। मल्टीपल मायलोमा यह प्लाज्मा कोशिकाओं में होने वाला कैंसर है। इससे शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बीमारी जैसे लग सकते हैं। इसलिए कई लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
यदि नीचे दिए गए लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। लगातार बुखार रहना और दवा के बाद भी ठीक न होना। बिना किसी कारण तेजी से वजन कम होना। हर समय थकान या कमजोरी महसूस होना। बार बार संक्रमण होना। रात में जरूरत से ज्यादा पसीना आना। गर्दन बगल या शरीर के अन्य हिस्सों की लिम्फ नोड्स में सूजन आना।
मामूली चोट पर भी आसानी से खून निकलना या शरीर पर नीले निशान बन जाना। हड्डियों में लगातार दर्द या कमजोरी महसूस होना। हालांकि ब्लड कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं माना जाता। लेकिन कुछ स्थितियों में इसका खतरा बढ़ सकता है। बढ़ती उम्र परिवार में कैंसर का इतिहास पहले कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी ले चुके लोग।
धूम्रपान करने वाले और बेंजीन जैसे हानिकारक रसायनों के लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों में खतरा ज्यादा हो सकता है। यदि ऊपर बताए गए लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार बार दिखाई दें तो उन्हें सामान्य कमजोरी या मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर की सलाह जांच और सही इलाज से कई मामलों में बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।