Shimla News: हमारी रसोई में मिलने वाली रोजमर्रा की सब्जियों का भी एक रोचक इतिहास रहा है। आलू की तरह ही शिमला मिर्च की यात्रा भी काफी अनोखी है। अधिकतर लोग सोचते हैं कि इसका नाम हिमाचल की राजधानी शिमला से कैसे जुड़ा और इसे यह खास पहचान कैसे मिली।
क्रिस्टोफर कोलंबस जब भारत की खोज में दक्षिण अमेरिका पहुंचे, तो उन्होंने वहां के लोगों को इसका इस्तेमाल करते देखा। उन्होंने इसे गलती से काली मिर्च समझा और इसका नाम पेपर रख दिया। इसके बाद 1493 में स्पेन में इसकी खेती शुरू हुई, जबकि दक्षिण अमेरिका में यह हजारों साल पुरानी थी।
वास्को डी गामा के जरिए भारत पहुंची तीखी मिर्च
इतिहासकारों के अनुसार वास्को डी गामा ने मिर्च को भारत तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। पुर्तगालियों ने सबसे पहले गोवा में इसे उगाना शुरू किया था। समय के साथ यह पूरे भारत में लोकप्रिय हो गई। हालांकि, पुर्तगालियों द्वारा भारत में लाई गई शुरुआती मिर्च स्वाद में काफी तीखी मानी जाती थी।
भारत में बिना तीखेपन वाली मीठी कैप्सिकम लाने का पूरा श्रेय ब्रिटिश हुकूमत को जाता है। अंग्रेजों ने अमेरिका से इसके खास बीज मंगवाए थे। औपनिवेशिक दौर में अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला थी, इसलिए इस नई फसल को पहली बार शिमला की वादियों में उगाया गया और वहीं से इसका नाम पड़ा।
