कोलकाता के बेल्वेडियर हाउस में खुला अनोखा शब्दलोक संग्रहालय, आधुनिक तकनीक से जानिए भारतीय भाषाओं की ऐतिहासिक विकास यात्रा

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Kolkata News: कोलकाता के ऐतिहासिक बेल्वेडियर हाउस में भाषा और संस्कृति को समर्पित अनोखा म्यूजियम ऑफ वर्ड यानी ‘शब्दलोक’ शुरू हुआ है। 41 करोड़ रुपये की लागत से बने इस संग्रहालय में आगंतुक स्पर्श, ध्वनि और 3D तकनीक के जरिए भारत की 22 भाषाओं और समृद्ध बोलियों के ऐतिहासिक सफर को गहराई से महसूस कर सकते हैं।

नौ दीर्घाओं में आधुनिक तकनीक से सजीव हुआ भाषाई इतिहास

राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद और संस्कृति मंत्रालय द्वारा विकसित इस संग्रहालय में नौ विशेष गैलरी बनाई गई हैं। यहां प्रथम शब्द दीर्घा में मानव संवाद की शुरुआत, मातृभाषा दीर्घा में भाषाई विविधता और नवरस दीर्घा में मानवीय भावनाओं को दर्शाया गया है। होलोग्राम तकनीक के जरिए यहां विभिन्न कलाओं और भाव-भंगिमाओं की सजीव प्रस्तुति देखने को मिलती है।

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प्राचीन शैलचित्रों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक हिंदी का विकास

संग्रहालय में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के क्रमिक विकास को बेहद प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया है। शैलचित्रों, शिलालेखों, ताम्रपत्रों और दुर्लभ पांडुलिपियों से शुरू होकर मुद्रण तकनीक और गूगल जैसे डिजिटल माध्यमों तक का सफर यहां मौजूद है। इसके अलावा इंटरएक्टिव डिस्प्ले और साउंड प्लेटफॉर्म पर ऐतिहासिक भाषण और साहित्यिक कृतियां भी सुनी जा सकती हैं।

शब्दलोक में लोक कलाओं और मौखिक कथावाचन की समृद्ध परंपराओं को भी प्रमुखता दी गई है। वैश्विक संवाद दीर्घा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय भाषाओं के प्रभाव को रेखांकित करती है। वर्चुअल रियलिटी, आगमेंटेड रियलिटी और रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान जैसी उन्नत तकनीकों की सहायता से यह संग्रहालय नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने का काम करता है।

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