Nainital News: नीम करौली बाबा का पावन कैंची धाम अपनी आध्यात्मिक शांति के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हाल ही में फिल्म हनुमान अंश के बाद यह स्थल अधिक चर्चा में आया है। शिप्रा नदी किनारे स्थित इस पवित्र धाम में जाने से पहले यात्रा मार्ग, मौसम और नियमों की जानकारी होना जरूरी है।
सड़क, रेल और हवाई मार्ग से कैंची धाम कैसे पहुंचे
नैनीताल से महज 17 किलोमीटर दूर स्थित इस धाम के लिए तीनों यातायात विकल्प मौजूद हैं। ट्रेन यात्रा के लिए 38 किलोमीटर दूर काठगोदाम निकटतम रेलवे स्टेशन है, जहां दिल्ली से सीधी ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा 70 किलोमीटर दूर पंतनगर हवाई अड्डे से सीधी टैक्सी सेवा उपलब्ध रहती है।
सड़क मार्ग से जाने वाले श्रद्धालु दिल्ली के आनंद विहार से सीधी बस सेवा ले सकते हैं। हल्द्वानी और भवाली के रास्ते निजी कार या बस से करीब 8 घंटे का समय लगता है। नैनीताल पहुंचकर स्थानीय वाहनों से धाम तक का सफर बेहद सुगम और सरल तरीके से पूरा किया जा सकता है।
यात्रा के लिए सबसे अनुकूल मौसम और दर्शन का समय
कैंची धाम भ्रमण के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है। इस दौरान मौसम पूरी तरह सुखद रहता है। भारी बारिश के दिनों में भूस्खलन के खतरे से बचने के लिए यात्रा टालने की सलाह दी जाती है ताकि रास्ते बंद न मिलें।
मंदिर के कपाट सुबह 6:45 बजे से रात 8 बजे तक दर्शन के लिए खुले रहते हैं। प्रातः और संध्या आरती ठीक 7 बजे संपन्न कराई जाती है। प्रत्येक मंगलवार को विशेष कीर्तन का आयोजन होता है, जिसके चलते दर्शन का सिलसिला रात 9 बजे आरती के साथ संपन्न होता है।
आश्रम दर्शन के कड़े नियम और ठहरने की व्यवस्था
परिसर में प्रवेश करते समय भक्तों को शालीन वस्त्र पहनना अनिवार्य है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आश्रम के भीतर कैमरा या मोबाइल से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूरी तरह पाबंदी है। श्रद्धालु परिसर में बैठकर शांति से हनुमान चालीसा का पाठ अथवा राम नाम का जाप कर सकते हैं।
आश्रम परिसर में रुकने के सीमित साधन हैं, इसलिए अग्रिम व्यवस्था करना बेहद जरूरी है। ज्यादातर पर्यटक नैनीताल अथवा भीमताल में होटल या होमस्टे की अग्रिम बुकिंग कराते हैं। पीक सीजन में भीड़ अधिक रहने के कारण यात्रा शुरू करने से पहले कमरे सुरक्षित करा लेना अधिक सुविधाजनक रहता है।