Lifestyle News: नई पीढ़ी यानी जेन-जी का काम करने का अंदाज पुराने ढर्रे से बिल्कुल जुदा है। कार्यस्थल पर मानसिक शांति और पर्सनल लाइफ को प्राथमिकता देते हुए इस पीढ़ी ने अपनी अलग वर्क डिक्शनरी तैयार कर ली है। आइए जानते हैं कॉर्पोरेट ऑफिसों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे इन खास शब्दों के सही मायने।
बेयर मिनिमम मंडे और बर्नआउट की नई परिभाषा
वीकेंड के बाद सोमवार को काम का भारी दबाव झेलने के बजाय कर्मचारी ‘बेयर मिनिमम मंडे’ का तरीका अपना रहे हैं। इसका सीधा अर्थ है कि हफ्ते के पहले दिन केवल बेहद जरूरी काम ही निपटाए जाएं। हालांकि कुछ लोग इसे कामचोरी मानते हैं, लेकिन मेंटल हेल्थ के लिए इसे काफी फायदेमंद माना गया है।
वहीं लगातार बिना ब्रेक काम करने से होने वाली मानसिक और शारीरिक थकावट को ‘बर्नआउट’ कहा जाता है। युवा प्रोफेशनल्स ऑफिस में मेंटल डिटॉक्स की अहमियत समझाने के लिए इस शब्द का उपयोग करते हैं। जब तनाव हद से बढ़ जाए, तब इस स्थिति से उबरने के लिए ब्रेक लेना जरूरी माना जाता है।
माइक्रोमैनेजिंग और क्वाइट क्विटिंग का प्रभाव
जब कोई सीनियर या बॉस काम के अंतिम नतीजों के बजाय कर्मचारी के हर छोटे कदम पर गैर-जरूरी निगरानी रखने लगे, तो इसे ‘माइक्रोमैनेजिंग’ कहते हैं। इससे काम करने की आजादी प्रभावित होती है। इसके जवाब में कई कर्मचारी ‘क्वाइट क्विटिंग’ की राह चुनते हैं, जिसका मतलब तय वेतन और घंटों के हिसाब से काम करना है।
दफ्तर के तय समय के बाद ईमेल या मैसेज का जवाब न देना ‘प्लग ऑफ’ कहलाता है, जिससे निजी जीवन प्रभावित न हो। इसके अलावा जब कर्मचारी अत्यधिक काम के दबाव या कद्र न मिलने से आहत होकर एक साथ कई नौकरियों में आवेदन करता है, तो इस चलन को ‘रेज अप्लाइंग’ कहा जाता है।