Kasauli News: कसौली में आयोजित 15वें खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन सैन्य रणनीतियों और ऐतिहासिक निर्णयों पर गंभीर चर्चा हुई। लेखक और पूर्व सैन्य अधिकारी प्रोबल दासगुप्ता ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को प्रशासनिक स्तर की बड़ी विफलता करार दिया। साथ ही उन्होंने जनरल के. सुंदरजी की नीतियों, ऑपरेशन ब्रासटैक्स और श्रीलंका में लिट्टे को लेकर भारत के फैसलों पर विस्तार से बात की।
हिमाचल प्रदेश के कसौली में आयोजित 15वें खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल (KSLF) का समापन हो गया। तीन दिवसीय इस आयोजन के अंतिम दिन सैन्य इतिहास, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीति से जुड़े कई संवेदनशील विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान ‘जनरल सुंदरजी: सेलिब्रेटेड ऑर डिबेटेड’ सत्र में पूर्व सैन्य अधिकारी, भाषाविद् एवं लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने जनरल के. सुंदरजी के जीवन, उनके रणनीतिक दृष्टिकोण और विवादित कदमों पर अपनी बात रखी।
प्रोबल दासगुप्ता ने 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिक्र करते हुए इसे प्रशासनिक स्तर की बड़ी नाकामी बताया। उन्होंने कहा कि उस समय मेजर जनरल के. एस. बराड़ ने स्वर्ण मंदिर परिसर की घेराबंदी का सुझाव दिया था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और कमान के बीच उचित तालमेल न होने के चलते गंभीर विवाद पैदा हुआ। दासगुप्ता के अनुसार, जनरल सुंदरजी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से सीधा संपर्क साधकर सैन्य प्रोटोकॉल को दरकिनार किया और तत्कालीन सेना प्रमुख की औपचारिक कमान व्यवस्था से आगे बढ़कर अपनी योजना लागू करवाने का प्रयास किया था।
ऑपरेशन ब्रासटैक्स और परमाणु ठिकानों पर चर्चा
ऑपरेशन ब्रासटैक्स पर विचार रखते हुए प्रोबल दासगुप्ता ने कहा कि उस दौरान पाकिस्तान सीमा पर करीब पांच लाख भारतीय सैनिक तैनात किए गए थे। जनरल सुंदरजी पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों और सैन्य क्षमताओं की वास्तविक परीक्षा लेना चाहते थे। हालांकि, इस आक्रामक रणनीति के कारण दोनों देशों के बीच तनाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया था और दोनों युद्ध के बेहद करीब पहुंच गए थे। दासगुप्ता ने अपना निजी आकलन साझा करते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्रासटैक्स के दौरान भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने का अंतिम रणनीतिक अवसर खो दिया था। इन विवादों के बावजूद उन्होंने जनरल सुंदरजी को भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे प्रभावशाली सेनापतियों में से एक माना।
श्रीलंका नीति और राजीव गांधी से जुड़े घटनाक्रम
श्रीलंका में भारतीय हस्तक्षेप पर चर्चा करते हुए दासगुप्ता ने कहा कि शुरुआती दौर में भारत ने श्रीलंका सरकार के खिलाफ संघर्ष में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) की मदद की थी। उन्होंने उल्लेख किया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण से मुलाकात के दौरान उसे एक बुलेटप्रूफ जैकेट भेंट की थी। इसके लगभग चार वर्ष बाद लिट्टे से जुड़े आतंकवादियों ने ही राजीव गांधी की हत्या कर दी।
साहित्य, कला और 160 साल पुराना लेटर बॉक्स रहा आकर्षण का केंद्र
‘द आर्ट ऑफ डिसएग्रीमेंट’ थीम पर आयोजित इस तीन दिवसीय उत्सव में विभिन्न वैचारिक और सांस्कृतिक सत्र आयोजित किए गए। दिन की शुरुआत संदीप सिंह के संगीत सत्र ‘मेलोडियस प्रीफेस: डिवाइन स्ट्रिंग्स’ से हुई। वहीं फिरोज गुजराल और अमन नाथ के सत्र ‘ब्रश विद लाइफ: सतीश गुजराल’ में कला और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे गए।
फेस्टिवल परिसर में लगा 160 साल पुराना ब्रिटिशकालीन पिलर लेटर बॉक्स भी आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा। डिजिटल युग में डाक संस्कृति की याद दिलाते इस ऐतिहासिक धरोहर के साथ साहित्यकारों और आगंतुकों ने तस्वीरें खिंचवाईं। कार्यक्रम के अंत में आयोजक राहुल सिंह और मधुर सिंह ने सभी का आभार जताया, जबकि रेने सिंह ने ‘बियॉन्ड द लास्ट पेज’ के तहत फेस्टिवल का गीत प्रस्तुत कर इसे यादगार विदाई दी।