Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने जिला परिषद शिमला के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में हो रही देरी पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने डीसी शिमला और मुख्य सचिव के जरिए सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को तय की गई है।
न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने मंगलवार को नवनिर्वाचित सदस्यों की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया टालने पर कड़ा संज्ञान लिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नतीजे आने के ढाई महीने बाद भी जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया गया है और प्रशासन जानबूझकर देरी कर रहा है।
यह याचिका ममता और 12 अन्य निर्वाचित सदस्यों ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि डीसी शिमला को तुरंत बैठक बुलाकर चुनाव पूरा कराने का निर्देश दिया जाए। 6 जून 2026 को सभी 25 सदस्यों ने शपथ ली थी। इसके बाद पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत चुनाव होना तय था।
प्रशासन ने ठोस वैधानिक कारण बताए बिना बैठक स्थगित कर दी। 27 जून और 3 अगस्त को बुलाई गई बैठकों में भी एजेंडा स्पष्ट नहीं था। कोरम न होने और डीसी के अनुपस्थित रहने से प्रक्रिया अधर में लटक गई। जनवरी 2026 में कार्यकाल खत्म होने के बाद से संस्था बिना नेतृत्व के काम कर रही है।
जिला परिषद का गठन न होने से ग्रामीण इलाकों के विकास काम रुके हुए हैं। अगर राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो शिमला के 25 वार्डों में भाजपा समर्थित 11, कांग्रेस समर्थित 10 और 4 निर्दलीय जीते हैं। भाजपा को 2 निर्दलीय सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, जबकि बाकी 2 सदस्यों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है।