Shimla News: जिला शिमला में 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल देने वाले सभी निजी विद्यालयों, प्ले स्कूलों, नर्सरी और किंडरगार्टन केंद्रों के लिए पंजीकरण करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल शिक्षा विभाग या अन्य बोर्ड की सामान्य मान्यता होना इस विशेष पंजीकरण का विकल्प नहीं है।
हिमाचल प्रदेश प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा केंद्र (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2017 तथा 17 मार्च, 2026 को अधिसूचित नए नियमों के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके दायरे में निजी क्षेत्र में संचालित सभी प्ले स्कूल, डे-केयर, नर्सरी, किंडरगार्टन और संबंधित प्रारंभिक शिक्षा केंद्र आएंगे।
केवल मान्यता प्राप्त होना काफी नहीं, अलग से कराना होगा पंजीकरण
महिला एवं बाल विकास विभाग शिमला की जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) ममता पॉल ने जिला के सभी निजी स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने संस्थानों में संचालित ईसीसीई (ECCE) केंद्रों का पंजीकरण निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित करें।
विभाग के अनुसार, किसी स्कूल का राज्य शिक्षा विभाग या केंद्रीय बोर्ड से मान्यता प्राप्त होना ईसीसीई अधिनियम के तहत अनिवार्य पंजीकरण की शर्त को खत्म नहीं करता। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नन्हें बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित, अनुकूल और बाल-केंद्रित शैक्षणिक परिवेश देना है। इसके तहत संस्थानों को प्रशिक्षित स्टाफ, बच्चों के अनुकूल शौचालय, स्वच्छ पेयजल, खेल एवं शिक्षण सामग्री, प्राथमिक उपचार और तय वयस्क-बाल अनुपात (टीचर-स्टूडेंट रेश्यो) जैसे कड़े मानकों का पालन करना होगा।
HimSeva पोर्टल पर ऑनलाइन होगा आवेदन
प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की है। जिला शिमला के सभी पात्र संस्थान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट wcd.hp.gov.in पर उपलब्ध HimSeva पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन मिलने के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर फाइल संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) को भेजेंगे।
एक महीने के भीतर होगा भौतिक सत्यापन
उपायुक्त शिमला की अध्यक्षता में हुई बैठक के अनुसार, जिला के प्रत्येक विकासखंड में एसडीएम की अध्यक्षता में विशेष ईसीसीई समितियों का गठन किया गया है। आवेदन प्राप्त होने के एक माह के भीतर यह खंड स्तरीय समिति संबंधित स्कूल या केंद्र का भौतिक निरीक्षण करेगी।
निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और तय मानकों के अनुपालन की जांच कर रिपोर्ट आगामी स्वीकृति के लिए सक्षम प्राधिकारी को भेजी जाएगी।
नए सत्र से पहले पूरी करनी होंगी औपचारिकताएं
जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र और प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने वाले अथवा बिना पंजीकरण संचालित होने वाले संस्थानों के खिलाफ अधिनियम के प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।