Shimla News: शादी का वादा टूटना हर हाल में जुर्म नहीं होता। शिमला की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में कुल्लू निवासी युवक को बरी कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि शुरुआती नीयत में खोट न हो, तो यह अपराध नहीं बनता।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि केवल रिश्ता टूटने से जुर्म साबित नहीं होता। इसके लिए यह जरूरी है कि आरोपी का इरादा पहले दिन से ही धोखा देने का रहा हो। हालात के चलते शादी न होना अपराध नहीं है।
केस के विवरण के अनुसार युवक और युवती के बीच सोशल मीडिया से बातचीत शुरू हुई थी। इसके बाद दोनों की दोस्ती गहरी हो गई। दोनों करीब दस महीने तक एक कमरे में मिलते रहे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच शादी को लेकर भी गंभीर सहमति बनी हुई थी।
मामले में मोड़ 14 दिसंबर 2024 को आया, जब युवक अपने माता-पिता के साथ शादी की बात पक्की करने पहुंचा। हालांकि उस समय युवती वहां मौजूद नहीं थी। इसी बात पर दोनों परिवारों में तकरार हुई और रिश्ता टूट गया। इसके बाद युवती ने बालूगंज थाने में युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी।
पुलिस ने युवक के खिलाफ बीएनएस की धारा 69 के तहत केस दर्ज किया था। अदालत ने ट्रायल में सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों की समीक्षा की। कोर्ट ने माना कि शादी न होना और धोखा देना दो अलग बातें हैं। नीयत में खोट साबित न होने पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।