Shimla News: खुले में शौच से मुक्त हिमाचल प्रदेश ग्रामीण स्वच्छता को वैज्ञानिक बनाने में जुट गया है। सरकार ने नए फीकल स्लज प्लांट लगाने के बजाय मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उपयोग करने का फैसला किया है। इस खास को-ट्रीटमेंट मॉडल के जरिए पूरे प्रदेश की स्वच्छता व्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।
हिमाचल के 7000 गांवों को मिलेगा वैज्ञानिक स्वच्छता प्रबंधन का लाभ
इस व्यवस्था से हिमाचल प्रदेश के 7,000 से अधिक गांवों को वैज्ञानिक स्वच्छता प्रबंधन का सीधा लाभ मिलेगा। इस मॉडल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के सेप्टिक टैंकों और गड्ढा शौचालयों से फीकल स्लज एकत्र किया जाएगा। इसके बाद कचरे को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाकर सुरक्षित रूप से उपचारित किया जाएगा।
नए प्लांट ना बनाने से सरकारी बजट की भारी बचत होगी और संसाधनों का सही इस्तेमाल होगा। पहाड़ी राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए यह एक बेहद व्यावहारिक और पर्यावरण अनुकूल समाधान है। सरकार ने 30 को-ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देकर जल शक्ति विभाग को 15 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
पालमपुर और सुंदरनगर में काम शुरू, 2027 तक का लक्ष्य
पालमपुर और सुंदरनगर में निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसके चलते आसपास के ग्रामीण इलाकों को लाभ मिलने लगा है। सरकार ने सभी स्वीकृत 30 परियोजनाओं को 31 मार्च 2027 तक संचालित करने का लक्ष्य रखा है। तय समय सीमा में काम पूरा होने से गांव की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार आएगा।
सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले कचरे का सही उपचार न होने पर जलस्रोत दूषित हो जाते हैं। इससे डायरिया, हैजा और टायफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नई व्यवस्था से प्राकृतिक जलस्रोतों, नदियों और कृषि भूमि का बचाव होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और जनस्वास्थ्य को स्थायी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार ओडीएफ की उपलब्धि को स्थायी बनाने के लिए काम कर रही है। पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। यह नई पहल एक स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण अनुकूल हिमाचल प्रदेश के निर्माण में बेहद अहम कदम साबित होगी।