हिमाचल हाई कोर्ट का शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला, आचार संहिता के नाम पर नियमितीकरण में देरी को बताया अधिकारों का हनन

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के लेक्चरर्स स्कूल न्यू के पक्ष में अहम निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुबंध अवधि पूरी होने पर आचार संहिता या प्रशासनिक देरी के बहाने नियमितीकरण रोकना मौलिक अधिकारों का हनन है। अदालत के इस फैसले से शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की पीठ ने मोहिंदर सिंह व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2021 में अनुबंध पर नियुक्त किया गया था। दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर उन्हें 6 जुलाई 2024 को देरी से नियमित किया गया था।

शिक्षकों ने नियमितीकरण नीति की शर्त नंबर नौ को चुनौती दी थी, जिसके तहत आदेश जारी होने की तारीख से लाभ मिलता था। कोर्ट ने सरकार की आचार संहिता वाली दलील खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि आचार संहिता समाप्त होने पर कर्मचारियों को पुरानी देय तिथि से ही सभी लाभ मिलने चाहिए।

हाई कोर्ट ने नीति की शर्त नंबर नौ को अमान्य घोषित करते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को 1 अप्रैल 2024 से नियमित कर्मचारी मानने का आदेश दिया है। इसके साथ ही शिक्षकों को उसी तारीख से नियमित वेतनमान, पे फिक्सेशन और अन्य वित्तीय लाभ देने के निर्देश दिए हैं।

Right News Desk
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लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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