Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला समेत पूरे राज्य में सोमवार को ‘खेती बचाओ, उद्योग बचाओ’ के नारे के साथ बड़ा प्रदर्शन हुआ। सीटू और हिमाचल किसान सभा के आह्वान पर लगभग 25 स्थानों पर रैलियां, धरने और जेल भरो आंदोलन आयोजित किए गए। आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
शिमला में सैकड़ों प्रदर्शनकारी गिरफ्तारी देने पहुंचे, लेकिन प्रशासन ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया। प्रदर्शन में किसान सभा, सेब उत्पादक संघ, एसएफआई और पेंशनर एसोसिएशन समेत कई संगठन शामिल हुए। रामपुर और नाहन में चक्का जाम किया गया। शिमला में अलग-अलग जगहों से तीन रैलियां निकालकर जनसभा आयोजित की गई।
प्रदर्शनकारियों ने चार लेबर कोड, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और मुक्त व्यापार समझौतों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, नई शिक्षा नीति और आउटसोर्स नीति के मुद्दे उठाए। इसके अलावा संसद और विधानसभा में महिला आरक्षण लागू करने तथा छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग की गई।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और किसान नेताओं ने कहा कि 10 अगस्त का यह आंदोलन 26 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले देशव्यापी संघर्ष की तैयारी है। उन्होंने कहा कि चार लेबर कोड और मुक्त व्यापार समझौतों से किसानों, मजदूरों और हिमाचल की फल अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट गहराएगा।
आंदोलनकारी संगठनों ने कई प्रमुख मांगे सरकार के समक्ष रखी हैं:
- चार लेबर कोड रद्द किए जाएं और मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 42 हजार रुपये प्रतिमाह हो।
- सभी फसलों के लिए सी2+50 फीसदी के आधार पर कानूनी एमएसपी की गारंटी दी जाए।
- मनरेगा में 200 दिन काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी मिले, साथ ही किसानों का कर्ज माफ हो।
- बिजली का निजीकरण रोका जाए और प्री-पेड स्मार्ट मीटर वापस लिए जाएं।