Chamba News: जनजातीय उपमंडल पांगी की बर्फीली वादियों में दुर्लभ परिंदे हिमालयन स्नो कॉक की मौजूदगी दर्ज की गई है। किलाड़ वन परिक्षेत्र के प्रेग्रां बीट के बगोटू क्षेत्र में वन रक्षक तेज सिंह ने इसे कैमरे में कैद किया। चंबा जिले के पर्वतीय भूगोल में इस पक्षी की मौजूदगी का यह पहला ठोस और दस्तावेजी प्रमाण है।
अत्यधिक ऊंचाई पर रहने वाले दुर्लभ पक्षी की खासियतें
हिमालयन स्नो कॉक तीतर कुल का सबसे बड़ा और भारी पक्षी है। यह पक्षी मुख्य रूप से समुद्र तल से 3,000 से 5,500 मीटर की ऊंचाई पर रहता है। इन इलाकों में साल के अधिकांश महीनों में तापमान शून्य से नीचे रहता है। गर्मियों में यह बर्फ रेखा के पास चट्टानी ढलानों पर पाया जाता है।
सर्दियों में भारी बर्फबारी होने पर यह पक्षी नीचे आकर चट्टानी गुफाओं में शरण लेता है। इसका मजबूत शरीर, घने पंख और स्लेटी-सफेद रंग इसे बर्फीली चट्टानों में छिपने में मदद करते हैं। इस छलावरण के कारण यह बर्फीले तेंदुओं और शिकारी बाजों से अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह से सफल रहता है।
मध्य एशिया और भारत के प्रमुख पर्वतीय पर्यावास
यह दुर्लभ पक्षी मध्य और दक्षिण एशिया की पामीर, तियान शान, हिंदू कुश, काराकोरम और तिब्बत जैसी ट्रांस-हिमालयी पर्वतमालाओं में पाया जाता है। भारत में यह मुख्य रूप से लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू के ऊपरी पर्वतीय इलाकों में सीमित संख्या में दिखाई देता है।
पांगी के बगोटू क्षेत्र की खड़ी चट्टानें और बर्फीले ग्लेशियर इस पक्षी के लिए बेहद अनुकूल पर्यावास साबित हुए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इतनी ऊंचाई पर इस दुर्लभ पक्षी का दिखाई देना पांगी घाटी के समृद्ध वन्यजीव पर्यावास और जैविक विविधताओं का एक स्पष्ट और मजबूत प्रमाण है।
सुरक्षा और अवैध शिकार रोकने के सख्त निर्देश
डीएफओ वाइल्ड लाइफ चंबा नवनाथ माने ने बताया कि बगोटू क्षेत्र में फील्ड स्टाफ की सतर्कता से पक्षी की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण के लिए संबंधित बीट गार्ड को गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। बर्फीले क्षेत्रों में अवैध शिकार रोकने के लिए विभाग पूरी तरह मुस्तैद है।