Kangra News: पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर सभी सात जोड़ी ट्रेनों की आवाजाही शुरू न होने से जिला कांगड़ा के लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब इस ट्रैक पर दो जोड़ी ट्रेनें चलाई जा सकती हैं, तो बाकी पांच जोड़ी ट्रेनों को क्यों रोका गया है।
कांगड़ा घाटी रेल बहाली संघर्ष समिति ने इसके लिए स्थानीय राजनीति को जिम्मेदार ठहराया है। समिति के अध्यक्ष पीसी विश्वकर्मा का आरोप है कि पठानकोट के बीजेपी विधायक अश्विनी शर्मा के दबाव के कारण रेलवे बोर्ड और केंद्रीय रेल मंत्रालय सभी सात जोड़ी ट्रेनों को बहाल करने में देरी कर रहे हैं।
पठानकोट में रेलवे फाटक और ओवरब्रिज का विवाद
दूसरी तरफ बीजेपी विधायक का कहना है कि पठानकोट में रेलवे फाटक बंद रहने से शहर में घंटों भारी जाम लगा रहता है। इस वजह से व्यापारियों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को रोज काफी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं और उनका समय भी बर्बाद होता है।
इस तर्क पर रेल संघर्ष समिति का कहना है कि जब चार साल तक रेलवे ट्रैक बंद था, तब रेल मंत्रालय को अंडरब्रिज या ओवरब्रिज बना लेना चाहिए था। ऐसा करने से जाम की समस्या भी खत्म हो जाती और आज सभी ट्रेनों का संचालन आसानी से हो सकता था।
15 दिन में मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों में पुरानी समयसारिणी के अनुसार सभी ट्रेनें बहाल नहीं हुईं, तो पूरे हिमाचल प्रदेश में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू होगा। जरूरत पड़ने पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी धरना दिया जाएगा, जिसके लिए जनसमर्थन जुटाया जा रहा है।
पूर्व पंचायत समिति सदस्य साधूराम राणा का कहना है कि दो ट्रेनें चलने से आम जनता को फायदा नहीं मिल रहा है। चक्की खड्ड पुल टूटने के चार साल बाद दो ट्रेनें चलाकर सिर्फ दिलासा दिया गया है। एलीट ग्रुप के सदस्य रामपाल धीमान ने 15 अगस्त तक सभी ट्रेनें चलाने की मांग की है।