नेपाल बाढ़ त्रासदी से सीख लेने का सही वक्त, कांगड़ा में मची तबाही के बाद अब मजबूत करना होगा आपदा प्रबंधन

Share

- Advertisement -

Kangra News: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को फिर उजागर किया है। जन-धन की भारी हानि के बाद अब समय आ गया है कि पड़ोसी देश की इस त्रासदी से सबक लिया जाए। सुरक्षित भविष्य के लिए हिमालयी राज्यों को अपने मॉनिटरिंग सिस्टम को तुरंत मजबूत करना होगा।

प्रकृति के साथ निरंतर छेड़छाड़, जंगलों का अंधाधुंध कटान और नदियों के किनारे अनियंत्रित निर्माण से खतरा लगातार बढ़ रहा है। बादल फटना, भूस्खलन, पहाड़ों से चट्टानें गिरना और अचानक जलस्तर बढ़ना अब केवल संयोग नहीं है। इन भीषण हादसों के पीछे कमजोर भू-भाग, मानवीय हस्तक्षेप और बदलता पर्यावरण मुख्य वजह हैं।

हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिला भी बीते सालों में ऐसी ही प्राकृतिक आपदाओं का दर्द झेल चुका है। 22 सितंबर 2022 को खनियारा के घुरलू नाले में बादल फटने से खनियारा बाजार से लेकर हलमा तक तबाही मची थी। इसमें 15 घरों और कई दुकानों को नुकसान पहुंचा था, जबकि एक बच्चे को उसके पिता ने बचाया।

इसके बाद 25 जून 2025 को मनूनी खड्ड में बादल फटने से आई भीषण बाढ़ में आठ मजदूर बह गए थे। पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों के लंबे सर्च ऑपरेशन के बाद पांच मजदूरों के शव मिले, जबकि तीन लापता रहे। वहां अवैज्ञानिक माइनिंग और गलत डंपिंग ने इस तबाही और नुकसान को कई गुना बढ़ा दिया था।

नेपाल की घटना एक बड़ी चेतावनी है कि हमें संकट आने से पहले ही तैयारियां पुख्ता करनी होंगी। ग्लेशियरों, नदियों और संवेदनशील पहाड़ी ढाले वाले इलाकों में एडवांस अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की सख्त जरूरत है। नदियों से दूरी बनाकर निर्माण करना, वैज्ञानिक विकास और वनों का संरक्षण आज समय की मांग बन चुका है।

धर्मशाला में रह रहे नेपाली व गोरखाली समाज के लोग इस नेपाल हादसे से बेहद दुखी हैं। कैप्टन लव कुमार छेत्री और कैप्टन शिवराज थापा ने कहा कि इंटरनेट पर वायरल वीडियो डराने वाले हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आपदा से निपटने के लिए कंट्रोल रूम, टोल फ्री नंबर, मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

Read more

Related News