किन्नौर का पूह गांव भीषण जल संकट से बेहाल, ग्रामीणों ने उठाई तत्काल सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग

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Kinnaur News: भारत-तिब्बत सीमा पर बसे किन्नौर जिले के पूह गांव में गहराते जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्राम पंचायत प्रधान दोर्जे चीला की अगुवाई में एकत्रित ग्रामीणों ने एडीएम पूह को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पूरे क्षेत्र को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित कर राहत कार्य शुरू करने की मांग की।

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2025-26 के शीतकालीन मौसम में नाममात्र बर्फबारी हुई है। इससे क्षेत्र के अधिकांश प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। मुख्य पेयजल आपूर्ति ठप होने से आम जनता परेशान है। पानी न मिलने से सेब के बगीचे और फसलें सूख रही हैं।

‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत चयनित है गांव

पूह गांव केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के अंतर्गत आता है। यहां के ज्यादातर परिवार खेती और बागवानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय पर सहायता नहीं मिली तो किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्र से पलायन जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बनी होजो नाला उठाऊ सिंचाई योजना सड़क निर्माण के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है। सड़क बनाते समय मुख्य पाइप और ढांचे टूट गए, जिससे सिंचाई व्यवस्था ठप हो गई है। इस वजह से गांव में जल संकट और अधिक विकराल रूप ले चुका है।

ग्रामीणों की प्रशासन से मुख्य मांगें

ग्रामीणों ने मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • ग्राम पंचायत पूह को तुरंत प्रभाव से सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जाए।
  • राजस्व, उद्यान और जल शक्ति विभाग की संयुक्त टीम तुरंत मौके का निरीक्षण कर नुकसान की रिपोर्ट बनाए।
  • पंचायत को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य सूखा राहत तंत्र के तहत लाकर पीड़ितों को वित्तीय मदद मिले।

ग्राम पंचायत प्रधान दोर्जे चीला ने कहा, “यह केवल पानी की कमी का मामला नहीं, बल्कि पूह गांव के अस्तित्व और किसानों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल राहत कार्य शुरू करे।” प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल रहे।

Right News Desk
Right News Desk
लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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