शिपकी-ला से भारत और चीन के बीच छह साल बाद व्यापार शुरू, बिना करेंसी 329 साल पुराने बार्टर सिस्टम से होगा लेनदेन

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Kinnaur News: हिमाचल प्रदेश में इंडो तिब्बत बॉर्डर पर स्थित शिपकी-ला पास से भारत और चीन के बीच करीब छह साल बाद सीमा व्यापार दोबारा शुरू हो गया है। 1 अगस्त को राज्य के कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस व्यापार का औपचारिक शुभारंभ किया। कोरोना काल में साल 2020 से यह व्यापार पूरी तरह बंद पड़ा था।

329 साल पुराने बार्टर सिस्टम से होगा भारत-चीन व्यापार

इस व्यापार में लेन-देन के लिए यूपीआई, चेक या कैश का प्रयोग नहीं किया जाता है। आज भी 329 साल पुरानी व्यवस्था अपनाई जाती है। इसमें बार्टर सिस्टम के तहत सामान के बदले सामान का आदान-प्रदान होता है। 1 अगस्त को राजस्व एवं बागवानी मंत्री ने पूह के नमज्ञा में 1.70 करोड़ से बने छुप्पन ट्रेड मार्ट का उद्घाटन किया।

कैबिनेट मंत्री ने व्यापारियों से आयात-निर्यात नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा। पूंह व्यापार मंडल अध्यक्ष हिशे नेगी की मांग पर उन्होंने व्यापारिक वस्तुओं का दायरा बढ़ाने का आश्वासन दिया। राजस्व मंत्री ने कहा कि व्यापार शुरू होने से सीमावर्ती लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

1697 में बुशहर रियासत और तिब्बत के बीच हुई थी संधि

शिपकी-ला में सीमा व्यापार साल 1697 से जारी है। यहां डिजिटल या नकद भुगतान के बजाय केवल वस्तु विनिमय होता है। तत्कालीन बुशहर रियासत के राजा केहरी सिंह और तिब्बत के बीच यह संधि हुई थी। इसका कोई लिखित दस्तावेज नहीं है, बल्कि लोक शपथ ‘गामग्या’ परंपरा के तहत ही यह समझौता आज भी लागू है।

कार्यक्रम में नमज्ञा की प्रधान अंजलि नेगी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और स्थानीय समस्याएं रखीं, जिनका मंत्री ने तुरंत समाधान किया। वहीं डीसी किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने सेना, आईटीबीपी, कस्टम और ट्रेड अधिकारियों का आभार जताया। वस्तु विनिमय प्रणाली में बिना पैसों के सीधे सामान का लेन-देन किया जाता है।

Right News Desk
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लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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