Mandi News: हिमाचल प्रदेश के दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया है। आठ बार विधायक और दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे कौल सिंह ने हिसार में संत रामपाल के आश्रम में अपने 50 साल लंबे राजनीतिक सफर को विराम देने का ऐलान किया।
संत रामपाल से मुलाकात के दौरान लिया संन्यास का फैसला
कौल सिंह ने संत रामपाल से कहा कि वे चार बार कैबिनेट मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं। लोकतंत्र में अब नए नेतृत्व को आगे आना चाहिए। इसी सोच के साथ वे राजनीति छोड़ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अस्वस्थ पत्नी के जल्द ठीक होने की प्रार्थना की और हिमाचल में सत्संग कराने का आग्रह किया।
द्रंग विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में मची हलचल
वर्ष 1977 से राजनीति में सक्रिय कौल सिंह मंडी के द्रंग क्षेत्र की मुख्य धुरी रहे हैं। 2022 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कई मौकों पर कहा था कि जीत मिलने पर वे मुख्यमंत्री बनते। उनके संन्यास के बाद द्रंग के राजनीतिक गलियारों में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
पोते डा. कुलकीर्ति के राजनीतिक भविष्य पर कयास
राजनैतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि कौल सिंह अपने पोते डा. कुलकीर्ति के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। चर्चा है कि डा. कुलकीर्ति भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उनके हटने से द्रंग कांग्रेस में 2027 के चुनाव टिकट के लिए प्रदीप ठाकुर और जोगेंद्र गुलेरिया जैसे नेताओं के बीच मुकाबला कड़ा हो गया है।
कांग्रेस नेताओं ने फैसले पर पुनर्विचार की मांग की
कौल सिंह ठाकुर के इस अप्रत्याशित कदम के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में निराशा है। जिला कांग्रेस महासचिव हेम सिंह ठाकुर ने कहा कि कौल सिंह के बिना द्रंग की राजनीति अधूरी है। उन्होंने वरिष्ठ नेता से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने और पार्टी में सक्रिय बने रहने की गुहार लगाई है।