Kangra News: जिला कांगड़ा की ग्राम पंचायतों में महिला प्रधानों के कामकाज को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों पर पंचायती राज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचित महिला प्रधान की जगह यदि उनके पति या परिजन काम में हस्तक्षेप करेंगे तो कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रशासनिक आदेश के अनुसार पंचायत के एडमिनिस्ट्रेटिव अथवा फाइनेंशियल कार्यों में परिवार के किसी भी सदस्य की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के बाद दोष साबित होने पर संबंधित महिला प्रधान को सस्पेंड तक किया जा सकता है। लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है।
प्रशासनिक कार्यों और बैठकों में बाहरी दखल पर जांच
जिला प्रशासन को शिकायतें मिली हैं कि कुछ पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों की बजाय उनके पति या परिजन बैठकों में फैसले ले रहे हैं। इसके अलावा कई जगह राजनीतिक द्वेष के चलते विकास कार्यों की फाइलों को जानबूझकर अटकाने और सरकारी कामकाज में रुकावट डालने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों को किसी राजनीतिक मतभेद का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा। यदि किसी जनप्रतिनिधि ने जनहित के प्रोजेक्ट्स में लापरवाही बरती या जानबूझकर बाधा खड़ी की, तो विभागीय जांच पूरी होने के बाद उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अधिकारी का बयान, नियम तोड़ने वालों पर तुरंत एक्शन
जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने बताया कि अधिकांश महिला प्रधान बहुत बेहतरीन काम संभाल रही हैं। हालांकि, जहां भी अनाधिकृत दखल या लापरवाही की शिकायतें मिलती हैं, उनकी निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच में दोष साबित होते ही नियमों के तहत तुरंत निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
