Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा शुल्क में कमी करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। विधानसभा में धर्मशाला विधायक सुधीर शर्मा के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) आयोजित करने में होने वाले अतिरिक्त खर्च के कारण मौजूदा शुल्क व्यवस्था तय की गई है।
कंप्यूटर आधारित टेस्ट के कारण शुल्क संरचना में हुआ बदलाव
पूर्व में कर्मचारी चयन आयोग द्वारा पेन-पेपर मोड परीक्षाओं के लिए सामान्य वर्ग से 360 रुपये और आरक्षित वर्ग से 120 रुपये लिए जाते थे। भर्ती प्रक्रिया में डिजिटल बदलाव के बाद 7 अगस्त 2025 को राज्य चयन आयोग ने 100 रुपये परीक्षा शुल्क और एजेंसी के लिए 700 रुपये प्रसंस्करण शुल्क निर्धारित किया।
राज्य चयन आयोग की सभी परीक्षाएं अब ऑनलाइन आयोजित हो रही हैं। लोक सेवा आयोग ने 30 मार्च 2024 को परीक्षा शुल्क 400 से बढ़ाकर 600 रुपये किया था। इसके बाद 31 मार्च 2026 को सरकार ने लोक सेवा आयोग को भी अपनी स्वतंत्र शुल्क संरचना निर्धारित करने का अधिकार दे दिया।
छात्रों के विरोध के बीच सरकार ने साफ किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में शुल्क घटाना संभव नहीं है। आधुनिक तकनीक आधारित ऑनलाइन परीक्षाओं के संचालन, विशेषज्ञ एजेंसियों के भुगतान और अन्य प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत होती है, जिसके चलते यह शुल्क लिया जा रहा है।