Shimla News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के लोगों की पहचान उनके पारंपरिक और पौष्टिक खान-पान से रही है, लेकिन अब इन इलाकों में भी जंक फूड का चलन लगातार तेजी से बढ़ रहा है।
आईजीएमसी अस्पताल शिमला के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। इसके अनुसार, नुकसान की पूरी जानकारी होने के बावजूद बच्चे केवल स्वाद के लिए इसका सेवन कर रहे हैं।
विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर डीएस डडवाल के साथ डॉक्टर तमन्ना, डॉक्टर अंजलि महाजन, डॉक्टर नरेंद्र महाजन और डॉक्टर प्रेम लाल चौहान के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया। इसमें यह बात सामने आई कि करीब 43 प्रतिशत किशोर हफ्ते में एक से अधिक बार जंक फूड खाते हैं।
इस रिसर्च के लिए नौवीं कक्षा से लेकर जमा दो तक के कुल 337 छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया था। इस दौरान यह पाया गया कि चीनीयुक्त, कैफीन वाले और कार्बोनेटेड पेय पदार्थ किशोरों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय श्रेणी में बने हुए हैं।
अध्ययन के मुताबिक, साथियों का प्रभाव जंक फूड के सेवन से जुड़ा सबसे मुख्य कारक है। इसके अलावा, मोबाइल या अन्य डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल करते समय स्नैक्स खाने की आदत भी बच्चों को अनहेल्दी खान-पान की तरफ आकर्षित कर रही है।
हालांकि स्कूलों के भीतर जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है, फिर भी बच्चों की पसंद बदल रही है। जानकारों का कहना है कि किशोरों को केवल नुकसान बताने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनके लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प भी उपलब्ध कराने होंगे।
