Shimla News: हिमाचल प्रदेश में अब मौसम की सटीक जानकारी सिर्फ तहसील स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। केंद्र सरकार की विंड्स परियोजना के तहत राज्य की हर पंचायत में रियल टाइम मौसम संबंधी आंकड़े मिलेंगे। इससे कृषि, बागवानी और आपदा प्रबंधन में बड़ा सुधार आएगा और किसानों को सही समय पर मौसम की जानकारी मिल सकेगी।
3,713 मौसम केंद्र और रेन गेज स्थापित करने का लक्ष्य
इस योजना के तहत प्रदेश भर में 3,713 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में 130 केंद्रों से ट्रायल डेटा मिलना शुरू हो गया है। इनमें से 357 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 167 केंद्रों पर जरूरी उपकरण सफलता के साथ लगाए जा चुके हैं।
पहाड़ी इलाकों में थोड़ी दूरी पर ही मौसम तेजी से बदल जाता है। अब तक किसान जिला या उपमंडल स्तर के पूर्वानुमान पर निर्भर रहते थे। नए केंद्रों से बारिश, तापमान, नमी, हवा की रफ्तार और दिशा के रियल टाइम आंकड़े मिलेंगे। यह डेटा भारतीय मौसम विभाग और राज्य की एडवाइजरी सिस्टम से सीधा जुड़ेगा।
5 से 10 किलोमीटर के दायरे में होगी सटीक निगरानी
हर ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन 5 से 10 किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी करेगा, जबकि रेन गेज से बारिश का सटीक रिकॉर्ड मिलेगा। केंद्रों का चुनाव ऊंचाई, मौसम, खेती के रकबे और आबादी के आधार पर हुआ है। इसके तहत पंचायत स्तर पर मौसम की जानकारी मिलेगी और सिंचाई, बुवाई व स्प्रे का सही समय तय हो सकेगा।
इस तकनीक से ओलावृष्टि, भारी बारिश, बादल फटने और तेज हवाओं की अग्रिम चेतावनी आसानी से मिल सकेगी। फसल नुकसान के सटीक आंकड़े मिलने से फसल बीमा के दावों में पारदर्शिता आएगी। साथ ही कृषि, बागवानी और आपदा प्रबंधन विभागों को पंचायत स्तर पर अलर्ट जारी करने के लिए तुरंत रियल टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा।
मार्च 2027 तक पूरी होगी 72 करोड़ की परियोजना
केंद्र सरकार की 72 करोड़ रुपये की इस योजना का काम गुजरात और कानपुर की दो प्राइवेट कंपनियों को मिला है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिव सी पालरासू के अनुसार मार्च 2027 तक सभी स्थानों पर केंद्र स्थापित होंगे। इससे आपदा की पूर्व चेतावनी और फसलों के नुकसान का सटीक आकलन संभव होगा।
जिलावार स्थिति देखें तो कांगड़ा में 844 में से 115 और शिमला में 425 में से 15 केंद्रों से डेटा मिल रहा है। मंडी में 586, सोलन में 250, सिरमौर में 271, हमीरपुर में 260, चंबा में 321, कुल्लू में 227, ऊना में 255, बिलासपुर में 184, किन्नौर में 57 और लाहुल स्पीति में 33 साइट्स पर काम जारी है।