Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने भौगोलिक और आपदा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए सड़क तंत्र को मजबूत बनाने की योजना शुरू की है। प्रदेश में सड़कों की कुल लंबाई 41,903 किलोमीटर तक पहुंच गई है, जिससे 15,608 गांव सीधे जुड़े हैं। अब आधुनिक तकनीक और नए सुरक्षा मानकों के साथ सड़कों का निर्माण होगा।
बरसाती पानी से नुकसान रोकने के लिए बनी विशेष नीति
पहाड़ों में अत्यधिक बारिश के कारण सड़कों के धंसने और कटने की गंभीर समस्या सामने आती है। इससे निपटने के लिए सरकार ने विशेष सड़क जल निकासी नीति लागू की है। अब सड़क डिजाइन करते समय ही वर्षा की तीव्रता के आधार पर पक्की नालियां बनाना अनिवार्य होगा। नालियों में बाधा डालने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जीप और एंबुलेंस लिंक सड़कों की मजबूती के लिए सरकार ने जरूरी दिशा-निर्देश तय किए हैं। इसके तहत सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट, डंगे, ब्रेस्ट वॉल और क्रैश बैरियर जैसे सुरक्षा इंतजाम कड़े किए गए हैं। इन संपर्क मार्गों की गुणवत्ता सुनिश्चित करके ग्रामीण इलाकों में हर मौसम में निर्बाध आवागमन बनाए रखने का लक्ष्य रखा गया है।
लाइव अपडेट और गड्ढों की मरम्मत के लिए डिजिटल सिस्टम
आपदा के दौरान जनता को सड़क बंद होने और वैकल्पिक रास्तों की जानकारी देने के लिए केंद्रीकृत रोड स्टेटस इन्फार्मेशन सिस्टम बन रहा है। निर्माण और बिलिंग कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल अकाउंट्स सिस्टम लागू होगा। इसके साथ ही जुलाई 2026 में स्वीकृत सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति के तहत नियमित निगरानी अनिवार्य की गई है।
दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की पहचान और सुधार के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ बनेगा। बार-बार सड़क खुदाई को रोकने के लिए सरकार मुख्य मार्गों के साथ भूमिगत मल्टी-यूटिलिटी डक्ट बनाएगी। इससे केबल और पाइपलाइन बिछाने के दौरान नई सड़कों की टूट-फूट रुकेगी और सरकारी धन की बचत होगी।