Himachal News: पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में तेज होगी कानूनी कार्रवाई, फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई की तैयारी

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में सीबीआई ने कानूनी कार्रवाई की रफ्तार बढ़ा दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से इस मामले की रोजाना सुनवाई कराने की तैयारी में जुट गई है। इस कदम से लगभग चार साल पुराने इस मामले के आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है। सीबीआई का मकसद ट्रायल में तेजी लाकर जांच को जल्द नतीजे तक पहुंचाना है।

विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में केस चलाने की प्रक्रिया शुरू

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, जिन मामलों में जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं, उनकी सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में कराने की प्रक्रिया चालू कर दी गई है। हिमाचल प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में धांधली का मामला भी इसी श्रेणी में आता है। जांच एजेंसी इस प्रकरण में पहले ही अपनी विस्तृत जांच पूरी कर संबंधित अदालत के समक्ष चार्जशीट पेश कर चुकी है।

एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बाद बढ़ी सख्ती

केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 लागू कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हरी झंडी मिलने के बाद नया कानून देशभर में प्रभाव में आ गया है। इस कानून के तहत परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े मामलों में तेजी से न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन और सुनवाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पेपर चोरी कर 1.25 करोड़ का अवैध लेनदेन हुआ था

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, बिहार के दो मुख्य आरोपियों ने प्रश्नपत्र चुराया था। इसके बाद बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों को तीन से पांच लाख रुपये में पेपर बेचा गया था। पूरे फर्जीवाड़े के दौरान लगभग 1.25 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन की बात सामने आई थी।

जानिए मामले में कब-कब क्या हुआ

27 मार्च 2022 को प्रदेश के 81 केंद्रों पर कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परिणाम 5 अप्रैल 2022 को जारी हुआ, लेकिन कांगड़ा पुलिस ने 5 मई को शक के आधार पर कुछ अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया। इसके अगले दिन 6 मई 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने परीक्षा रद्द कर एसआईटी का गठन कर दिया था।

तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 17 मई 2022 को मामला सीबीआई को सौंपने का फैसला किया। इसके बाद सीबीआई ने 30 नवंबर 2022 को गगल और शिमला के भराड़ी थाने की एफआईआर के आधार पर केस दर्ज किया। सीबीआई ने 31 जनवरी 2023 को सात राज्यों के 50 ठिकानों पर छापेमारी की और 11 मार्च 2024 को शिमला की विशेष अदालत में 88 आरोपियों के खिलाफ दो चार्जशीट दाखिल कीं।

Desh Raj
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