Shimla News: केंद्र सरकार की वीबी-जी राम जी योजना में हिमाचल प्रदेश ने उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों को पछाड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राज्य ने सक्रिय श्रमिकों की भागीदारी और सीधे मजदूरी भुगतान में मजबूत बढ़त हासिल कर मिसाल कायम की है।
हालिया आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल में बारह लाख सत्तासी हजार सक्रिय श्रमिकों ने उन्नीस लाख तेईस हजार मानव दिवस अर्जित किए हैं। प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत अड़सठ करोड़ तिरानवे लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान चौदह सौ पंद्रह विकास कार्य सफलता से पूरे किए गए।
मजदूरी भुगतान के मामले में पूर्वोत्तर के राज्यों से आगे
राज्य ने कुल बजट में से चौवन करोड़ पांच लाख रुपये यानी उनासी दशमलव सत्तावन प्रतिशत राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में भेजी है। यह आंकड़ा पहाड़ी राज्यों में सबसे बेहतर माना जा रहा है। श्रमिकों को उनकी मेहनत का बड़ा हिस्सा सीधे मिलने से ग्रामीण आर्थिकी काफी मजबूत हुई है।
पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम ने इस योजना पर तिरासी करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। वहां मजदूरी की हिस्सेदारी करीब सत्तर प्रतिशत ही दर्ज की गई। मिजोरम की तुलना में हिमाचल प्रदेश ने कम कुल खर्च के बावजूद श्रमिकों के मजदूरी मद में अपेक्षाकृत अधिक और बेहतर हिस्सा सुरक्षित किया है।
चुनावी व्यस्तता के बावजूद बरकरार रखी विकास की रफ्तार
हिमाचल प्रदेश की यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि इस दौरान पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव चल रहे थे। नए प्रतिनिधियों के गठन और उनके प्रशिक्षण का काम भी तेजी से जारी था। इसके बावजूद प्रशासनिक मशीनरी ने विकास कार्यों और ग्रामीण रोजगार की रफ्तार को बिल्कुल धीमा नहीं पड़ने दिया।
सीमित संसाधनों और बारिश के मौसम के बावजूद प्रदेश ने बेहतरीन कार्य योजना और इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ जरूरतमंद लोगों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इस शानदार उपलब्धि ने अन्य पर्वतीय राज्यों के लिए भी बेहतर प्रबंधन की नई राह दिखाई है।