Shimla News: हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) राज्य में इलेक्ट्रिक बसों के लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है। निगम प्रदेश की 80 अलग-अलग जगहों पर 122 करोड़ रुपये से चार्जिंग स्टेशन तैयार कर रहा है। इससे राज्य में पर्यावरण अनुकूल और किफायती सार्वजनिक परिवहन सेवा को काफी बढ़ावा मिलेगा।
उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने रविवार को एचआरटीसी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने बताया कि राज्य में 34 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित हो चुके हैं। अगले एक महीने में 21 और जगहों पर काम पूरा होगा, जबकि बाकी 25 स्थानों पर भी काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।
सरकारी बसों को चार्जिंग सुविधा देने के लिए यह पूरा नेटवर्क एचआरटीसी के बस अड्डों और वर्कशॉप में विकसित हो रहा है। इससे अलग-अलग रूटों पर दौड़ रही बसों की रोजाना चार्जिंग बहुत आसान हो जाएगी। बसों के सुगम संचालन से यात्रियों को काफी राहत मिलने वाली है और समय भी बचेगा।
उप-मुख्यमंत्री के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार बेहद जरूरी है। यह राज्य में आधुनिक, किफायती और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने का अहम कदम है। एचआरटीसी चरणबद्ध तरीके से सभी जरूरी सुविधाएं बना रहा है, ताकि लोगों को बेहतर और आधुनिक सफर का अनुभव मिल सके।
राज्य के 80 अलग-अलग स्थानों पर कुल 99 चार्जिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। इन सभी स्टेशनों पर 180 किलोवाट क्षमता वाले तेज गति से चार्ज करने वाले सीसीएस-2 चार्जर लगेंगे। सरकार इन्हें सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रखकर निगम के विभिन्न डिपो में स्थापित कर रही है और आगे जरूरत अनुसार नए स्टेशन भी बनाएगी।
मौजूदा समय में एचआरटीसी के बेड़े में 297 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। ये बसें राज्य के छोटे और लंबे रूटों पर बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। इन बसों के चलने से निगम को डीजल की तुलना में प्रति किलोमीटर 15 से 16 रुपये की सीधी बचत हो रही है, जिससे निगम का परिचालन खर्च काफी घट गया है।
आमतौर पर एक बार चार्ज करने के बाद इलेक्ट्रिक बस लगभग 180 किलोमीटर का सफर तय करती है। लेकिन हरोली से चंडीगढ़ के 270 किलोमीटर लंबे मार्ग पर बस एक ही चार्ज में चल रही है। वहीं शिमला-चंडीगढ़-शिमला के 250 किलोमीटर लंबे रूट पर सफर के बाद भी 25 प्रतिशत बैटरी बची रहती है।