Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने टीजीटी (आर्ट्स) भर्ती में मेरिट और आरक्षण नियमों के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार और चयन आयोग को सख्त हिदायत दी है। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की कि भर्ती एजेंसियां इस मामले में गंभीर गलतफहमी में काम कर रही हैं।
चयन आयोग की रिपोर्ट और याचिकाकर्ता का तर्क
राज्य चयन आयोग ने 25 मई 2025 को पोस्ट कोड-25001 के तहत टीजीटी (आर्ट्स) के 425 पदों का विज्ञापन जारी किया था। इसमें जनरल के लिए 151 और एससी (बीपीएल) के लिए 17 पद आरक्षित थे। एससी (बीपीएल) श्रेणी की याचिकाकर्ता 64 अंक हासिल कर वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर रहीं।
भर्ती में सामान्य वर्ग की कटऑफ 71.31 रही। चयन आयोग के अनुसार, एससी (बीपीएल) श्रेणी के तीन अभ्यर्थियों ने जनरल कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए थे। इसके बावजूद आयोग ने उन्हें सामान्य श्रेणी में शिफ्ट करने के बजाय आरक्षित एससी (बीपीएल) कोटे में ही बनाए रखा।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का दिया हवाला
आयोग ने दलील दी कि कार्मिक विभाग के 12 नवंबर 2014 के निर्देशों के तहत हॉरिजॉन्टल आरक्षण में मेरिट का सिद्धांत लागू नहीं होता। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आरके सभ्रवाल बनाम पंजाब राज्य (1995) के ऐतिहासिक फैसले का स्पष्ट हवाला दिया।
अदालत ने साफ किया कि अगर आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर जनरल कटऑफ के बराबर या अधिक अंक लाता है, तो उसे सामान्य श्रेणी में चुना जाना चाहिए। इससे खाली हुई आरक्षित सीटें वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों से भरी जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।