21 साल तक साथ रहने पर महिला गुजारा भत्ता पाने की हकदार, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Share

- Advertisement -

Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पारिवारिक कानून और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला किसी व्यक्ति के साथ 21 वर्षों से अधिक समय तक पत्नी के रूप में रही है, तो वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण पाने की पूरी हकदार है।

अदालत ने माना कि लंबे समय तक साथ रहने और सार्वजनिक दस्तावेजों में पत्नी का दर्जा देने के बाद पति अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। पति केवल इस तकनीकी आधार पर गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं कर सकता कि महिला का अपने पहले पति से औपचारिक तलाक नहीं हुआ था।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की पीठ ने पाया कि फैमिली कोर्ट मंडी के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। इसके साथ ही उच्च अदालत ने पति की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने महिला के पक्ष में तय 5,000 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ते के आदेश को बरकरार रखा।

जानिए फैमिली कोर्ट के आदेश और हाई कोर्ट की दलील के बारे में

फैमिली कोर्ट मंडी ने 25 मार्च 2025 को याचिकाकर्ता अश्वनी कुमार को निर्देश दिया था कि वह अपनी पत्नी दासी उर्फ उमा देवी को याचिका दायर करने की तारीख से 5,000 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता दे। पति ने फैमिली कोर्ट के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

पति ने दलील दी थी कि महिला का उसके पहले पति से औपचारिक तलाक नहीं हुआ था। हालांकि, हाई कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि फैमिली कोर्ट मंडी के आदेश में कोई कानूनी कमी नहीं है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

Read more

Related News