हिमाचल प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर पुराने ट्रैफिक चालान माफ करने से किया साफ इनकार, हाई कोर्ट में दाखिल किया जवाब

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में लंबित ट्रैफिक चालानों को बिना किसी कार्रवाई के रद्द या माफ करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि पुराने चालानों को खत्म करने से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को बढ़ावा मिलेगा।

यह महत्वपूर्ण जानकारी हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ के सामने रखी गई। राज्य सरकार ने अपनी दलील में कहा कि वह चालान माफ करके आदतन नियम तोड़ने वाले चालकों को बढ़ावा बिल्कुल नहीं देना चाहती।

अदालत में परिवहन निदेशक की तरफ से पेश किए गए शपथपत्र में सरकार ने उत्तर प्रदेश के फॉर्मूले को लागू करने में पूरी असमर्थता जताई। सरकार का तर्क है कि चालान अपने आप समाप्त होने देने से आम जनता के मन में ट्रैफिक नियमों का डर पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

जिला अदालतों में लंबित चालानों की विशाल संख्या को देखते हुए हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने इस गंभीर मामले में हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाने के निर्देश जारी किए हैं।

खंडपीठ ने रजिस्ट्रार जनरल को आगामी सुनवाई तक प्रदेश की जिला अदालतों में पेंडिंग पड़े सभी चालानों का विस्तृत डाटा पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही जिला एवं सत्र न्यायाधीशों से चालानों की संख्या कम करने के लिए सुझाव मांगने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सात दिसंबर को तय की गई है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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