Shimla News: वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर के चुनावी राजनीति से संन्यास लेने के बाद हिमाचल कांग्रेस में बड़े सांगठनिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। संगठन सृजन अभियान के तहत पार्टी आलाकमान अब नए चेहरों को आगे लाने और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका तय करने पर काम कर रहा है।
पार्टी ने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के साथ बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब संगठन और चुनावी टिकट के लिए नेताओं की सक्रियता और प्रदर्शन को मुख्य पैमाना बनाया जा रहा है। शिमला स्थित पार्टी दफ्तर में पदाधिकारियों के काम की समीक्षा के लिए बाकायदा कनेक्ट सेंटर बनाया गया है।
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उन दिग्गज नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, जो पिछला चुनाव हार चुके हैं या पद न मिलने से कम सक्रिय हैं। ऐसे नेताओं की सूची में पूर्व मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी का नाम सबसे ऊपर है, जो लंबे समय से बड़ी जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे हैं।
हिमाचल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर संशय
पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर भी संगठन की कार्यप्रणाली से असहज दिखे हैं। ‘एक व्यक्ति एक पद’ के तहत पद छोड़ने के बाद फिलहाल उनके पास सरकार में कोई बड़ा पद नहीं है। उन्हें केवल राजनीतिक मामलों की समिति में जगह मिली है। वहीं पूर्व मंत्री आशा कुमारी भी राष्ट्रीय स्तर पर काम करने के बाद राज्य में सक्रिय हैं।
मंडी जिले के पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी लगातार दो चुनाव हारने के बाद भी संगठन में उपाध्यक्ष पद पर तैनात हैं। इसके अलावा पच्छाद के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर की कांग्रेस में वापसी हुई है। दूसरी ओर 82 वर्ष की उम्र पार कर चुके कैबिनेट मंत्री प्रो. चंद्र कुमार और कर्नल धनीराम शांडिल सक्रिय राजनीति में डटे हैं।
कांग्रेस नेतृत्व अब उन विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान दे रहा है, जहां पार्टी को लगातार हार का सामना करना पड़ा है। धर्मशाला में प्रस्तावित राजनीतिक मामलों की समिति की आगामी बैठक में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका, कमजोर सीटों की रणनीति और सांगठनिक फेरबदल पर विस्तृत चर्चा होने की पूरी संभावना है।