Shimla News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। भाजपा विधायक हाथों में अटैचियां लेकर पहुंचे और सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। जवाब में कांग्रेस विधायकों ने तख्तियां लेकर भाजपा पर निशाना साधा।
काउंसिल चैंबर के बाहर दोनों दलों के विधायक काफी देर तक एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। भाजपा ने प्रतीकात्मक रूप से अटैचियों का इस्तेमाल किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार का पैसा अटैचियों में भरकर मुख्यमंत्री कार्यालय और दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के पास भेजा जा रहा है।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भाजपा के इस प्रदर्शन को असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मंशा सदन की कार्यवाही चलाने की नहीं है। सत्र के पहले दिन भी विपिन परमार राष्ट्रगान के तुरंत बाद राष्ट्रगीत गाने की जिद पर अड़े थे।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने प्रश्नकाल शुरू कराया, लेकिन विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते हुए बाहर चले गए। हालांकि प्रश्नकाल समाप्त होने से पहले वे लौट आए। अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि सदन की शुरुआत राष्ट्रगान से होगी और समापन पूरे राष्ट्रगीत के साथ किया जाएगा।
राष्ट्रगान के समय की वीडियो क्लिप मांगने पर अध्यक्ष ने कहा कि अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और धारा 118 से जुड़े मामलों में धांधली के आरोप लगाए।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि आउटसोर्स कंपनियों में कांग्रेस नेताओं की हिस्सेदारी है और नौकरियों में कमीशन लिया जा रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती के बयान का हवाला दिया, जिन्होंने तीन अटैचियां दिल्ली और दो सीएम कार्यालय जाने का आरोप लगाया था।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भाजपा के अटैची प्रदर्शन पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त में दिए गए पैसे खत्म होने के कारण विपक्ष अब खाली अटैचियां लेकर घूम रहा है। सुक्खू ने दावा किया कि सरकार में किसी भी मंत्री पर कोई आरोप नहीं है।
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा पर प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता हिमाचल के अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन दिल्ली जाकर राज्य का फंड और हक रोकने का काम करते हैं। सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।