Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। जाली नियामकीय दस्तावेजों के जरिए फर्जी दवा कंपनी चलाकर खरीदारों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। आरोपी अजय कुमार के खिलाफ हरियाणा के कैथल में भी साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज है।
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर को मिली गुप्त सूचना पर विशेष जांच टीम बनाई गई। इस टीम में ड्रग इंस्पेक्टर विकास ठाकुर, सुरेश कुमार और अक्षय कुमार शामिल थे। बद्दी पुलिस ने एसपी विनोद धीमान के नेतृत्व में इस कार्रवाई में जांच टीम का पूरा सहयोग किया और आरोपी को दबोचा।
फर्जी दस्तावेजों और लाइसेंस से ऐंठते थे भारी रकम
जांच में पता चला कि आरोपी एम/एस डॉ. ट्रस्टमेड नाम से फर्जी फार्मास्यूटिकल फर्म चला रहा था। वह जाली ड्रग मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, जीएमपी/जीएलपी प्रमाणपत्र और नकली प्रोडक्ट परमिशन का इस्तेमाल करता था। इन नकली दस्तावेजों को असली बताकर वह खरीदारों से एडवांस भुगतान हासिल कर लेता था।
आरोपी के पास से जब्त इलेक्ट्रॉनिक सामान से हिमाचल ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन के नाम के फर्जी प्रमाणपत्र बरामद हुए हैं। शुरुआती जांच में इन सभी कागजातों के पूरी तरह जाली होने के ठोस सबूत मिले हैं। अब कैथल पुलिस आरोपी अजय कुमार को अपनी हिरासत में लेकर आगे की जांच करेगी।
प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति और कारोबारियों से खास अपील
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने स्पष्ट किया कि विभाग ऐसी अवैध गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाता है। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों और नकली दवा कंपनियों के जरिए लोगों को गुमराह करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने समय पर कार्रवाई करने के लिए अपनी जांच टीम की तारीफ की।
डॉ. कपूर ने दवा कारोबारियों, सप्लायर्स और खरीदारों से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी लेनदेन से पहले मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, जीएमपी प्रमाणपत्र और अन्य नियामकीय अनुमतियों की जांच संबंधित सरकारी विभाग से जरूर करा लें। इससे वे ठगी और फर्जीवाड़े का शिकार होने से पूरी तरह बच सकेंगे।