Shimla News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कल्याण समिति ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कार्यप्रणाली और वित्तीय खर्चों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समिति ने अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने के बावजूद बैठकों पर हुए भारी-भरकम खर्च की रिपोर्ट मांगी है।
आयोग में 30 जून 2023 से अध्यक्ष और छह सदस्यों के पद खाली पड़े हुए थे। इसके बावजूद 172 बैठकों के आयोजन पर लगभग 25.80 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। समिति ने सवाल उठाया है कि इतनी बैठकों के बाद कितनी शिकायतों का समाधान हुआ और बच्चों को असल राहत कितनी मिली।
कल्याण समिति के अध्यक्ष मोहन लाल ब्राक्टा ने महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 से जुलाई 2026 तक की बैठकों, कुल शिकायतों, उनके निपटारे और कर्मचारियों की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
समिति की जांच में सामने आया कि वर्ष 2022-23 के दौरान आयोग ने कुल 172 बैठकें आयोजित की थीं। इनमें से 171 बैठकें अकेले शिमला मुख्यालय में हुईं, जबकि महज एक बैठक हमीरपुर में आयोजित की गई थी।
नियमों के मुताबिक अध्यक्ष को प्रति बैठक 3000 रुपये और सदस्यों को 2000 रुपये मानदेय दिया जाता है। औसतन एक बैठक पर करीब 15 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसी आधार पर समिति ने बैठकों के कुल खर्च और उनके वास्तविक नतीजों का ब्योरा मांगा है।
आयोग के अध्यक्ष और छह सदस्यों का कार्यकाल 30 जून 2023 को समाप्त हो गया था। इसके बाद लंबे समय तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई। आखिरकार सरकार ने 19 अप्रैल 2026 को अनिता ठाकुर को अध्यक्ष नियुक्त कर सभी छह सदस्यों के पद भरे थे।
कल्याण समिति ने निजी स्कूलों के खिलाफ दर्ज मामलों की भी जिलावार रिपोर्ट मांगी है। इसमें मनमानी फीस, बस किराए में गड़बड़ी, शौचालय साफ कराने और आरटीई के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को प्रवेश न देने जैसी शिकायतें शामिल हैं।