शिमला में तड़के महसूस किए गए भूकंप के झटके, जानिए रूस में आए शक्तिशाली कंपन्न और वैज्ञानिक वजहें

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शनिवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार 17 अक्टूबर को तड़के 4 बजकर 36 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 मापी गई। इस घटना का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे दर्ज किया गया।

शनिवार तड़के जब लोग सो रहे थे, तभी अचानक धरती में कंपन महसूस हुआ। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। फिर भी अचानक आए झटकों से लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भूकंप की बड़ी घटना सामने आई है। इससे पहले रूस के कामचटका प्रायद्वीप क्षेत्र में शुक्रवार को 7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर ने बताया कि यह भूकंप जमीन के अंदर 140 किलोमीटर की गहराई पर आया था।

रूस में यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर लगभग 3:35 बजे घटी। भूकंप के बाद राहत की बात यह रही कि किसी सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गई। अमेरिकी राष्ट्रीय सुनामी चेतावनी केंद्र ने स्पष्ट किया कि इस शक्तिशाली झटके के बाद तटीय क्षेत्रों में किसी भी तरह की सुनामी का कोई खतरा नहीं है।

रूस में भूकंप से नुकसान का जायजा

रूस के इस भूगर्भीय झटके से किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या हताहत होने की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इतनी अधिक गहराई पर भूकंप आने के कारण सतह पर तबाही का असर काफी हद तक कम रहा।

भूवैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी सतह के नीचे मुख्य रूप से 7 बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं। ये प्लेट्स लगातार अपनी जगह पर धीरे-धीरे घूमती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं, तो उस क्षेत्र को फॉल्ट लाइन कहा जाता है, जहां भारी दबाव बनता है।

अत्यधिक दबाव बनने पर प्लेट्स के किनारे टूटने लगते हैं और अंदर जमा हुई ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता खोजती है। पृथ्वी की गहराई में होने वाली इसी भूगर्भीय उथल-पुथल और ऊर्जा के अचानक बाहर निकलने की प्रक्रिया को हम धरातल पर भूकंप के झटकों के रूप में महसूस करते हैं।

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता

भूकंप की भयावहता का सटीक आंकलन रिक्टर स्केल के जरिए किया जाता है। 6 से कम तीव्रता वाले भूकंपों को आमतौर पर बहुत ज्यादा खतरनाक नहीं माना जाता, क्योंकि इनसे केवल हल्का कंपन महसूस होता है। हालांकि, 7 से 9 की तीव्रता वाले भूकंप से इमारतों के गिरने और समुद्री तूफान आने का भारी खतरा रहता है।

यदि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 9 से अधिक दर्ज की जाती है, तो यह अपने साथ बेहद भयानक और प्रलयंकारी तबाही लेकर आता है। ऐसी स्थिति में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान होता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक भूकंपीय गतिविधियों पर लगातार अपनी नजर बनाए रखते हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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