आत्मविश्वास और ध्यान से मिली सफलता: 16 वर्षीय अक्षिता ने क्लैट में हासिल की ऑल इंडिया 29वीं रैंक, जानिए आर्ट ऑफ लिविंग का प्रभाव

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Una News: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की रहने वाली 16 वर्षीय अक्षिता धीमान ने क्लैट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 29वीं रैंक हासिल की है। उसने विपरीत परिस्थितियों में खुद पर भरोसा रखा और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में प्रवेश पाकर अपनी सफलता की नई कहानी लिखी।

अक्षिता ने कठिन क्लैट परीक्षा की तैयारी में आठ से नौ महीने लगाए थे। वर्ष 2025 की दीपावली की छुट्टियों के दौरान उसने आर्ट ऑफ लिविंग के ‘इंट्यूशन प्रोसेस’ में भाग लिया था। इसके नियमित अभ्यास से उसकी एकाग्रता बढ़ी और उसमें सकारात्मक आत्म-विश्वास का विकास हुआ, जिससे परीक्षा में सफलता मिली।

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर द्वारा शुरू किया गया ‘इंट्यूशन प्रोसेस’ सही समय पर सही विचार लाने में मदद करता है। अक्षिता मानती है कि इस प्रक्रिया से मिली आंतरिक स्पष्टता के कारण ही वह मुश्किल प्रश्नों का सामना कर सकी। उसने परीक्षा के दौरान शांत रहकर पहले आसान प्रश्नों को हल किया।

युवाओं में मानसिक तनाव पर हुए हालिया स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार चार जिलों के 2,895 युवाओं में से 15.54 प्रतिशत चिंता से ग्रसित पाए गए। इसके अलावा 19.62 प्रतिशत युवा मोबाइल फोन की लत के खतरे में हैं। अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के अध्ययन में भी सुदर्शन क्रिया के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2022 से कारागार कार्यक्रमों का विस्तार हुआ है, जिससे कंडा जेल में बंद कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। श्री श्री रवि शंकर के अनुसार हर अपराधी के पीछे एक पीड़ित व्यक्ति होता है, और योग, ध्यान तथा सुदर्शन क्रिया के जरिए उनका समुचित इलाज करना बेहद आवश्यक है।

धर्मशाला यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुदेव से प्रदेश में ड्रग-फ्री इंडिया अभियान बढ़ाने का आग्रह किया। धर्मशाला स्थित कैलाश आश्रम ध्यान का प्रमुख केंद्र है। कुठार खुर्द गांव में आर्ट ऑफ लिविंग के प्रयासों से 80 प्रतिशत ग्रामीणों को लाभ मिला और गांव को निर्मल ग्राम पुरस्कार प्राप्त हुआ।

अक्षिता की सफलता और सामाजिक बदलाव के उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं है। खुद पर अटूट विश्वास, ध्यान, सुदर्शन क्रिया और सेवा का मार्ग अपनाकर युवा न केवल परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं, बल्कि संपूर्ण समाज को भी सशक्त बना सकते हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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