Ghazipur News: गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद क्षेत्र में लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी और शरीर दर्द से पीड़ित कई मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ मरीजों की जांच रिपोर्ट में स्क्रब टाइफस की पुष्टि होने के बाद चिंता बढ़ गई है। संक्रमण के कारण मरीजों के लिवर एंजाइम और बिलीरुबिन में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले अंतर्गत मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र में रहस्यमयी बुखार और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत के बाद कई लोगों के अस्पताल पहुंचने का मामला सामने आया है। इनमें से कुछ मरीजों की नैदानिक जांच में स्क्रब टाइफस संक्रमण की पुष्टि हुई है। क्षेत्र के तिवारीपुर सहित आसपास के कई गांवों में इस बीमारी के लक्षण वाले मरीज सामने आ रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय स्तर पर कुल पुष्ट मामलों की वास्तविक संख्या डायग्नोस्टिक सेंटरों की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पताल में भर्ती मरीजों में कई दिनों से लगातार तेज बुखार, अत्यधिक शारीरिक कमजोरी, मांसपेशियों में खिंचाव व दर्द और भूख न लगने जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। चिकित्सकीय जांच के दौरान कई मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की संख्या अधिक पाई गई है। इसके अतिरिक्त, लिवर एंजाइम (AST, ALT) और बिलीरुबिन का स्तर भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह संक्रमण केवल बुखार तक सीमित न रहकर आंतरिक अंगों, विशेष रूप से लिवर को भी प्रभावित कर रहा है।
क्या है स्क्रब टाइफस और कैसे फैलता है संक्रमण?
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार स्क्रब टाइफस ‘ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी’ (Orientia tsutsugamushi) नामक जीवाणु के कारण होने वाला संक्रमण है। यह रोग संक्रमित लार्वा माइट (चिगर्स) के काटने से फैलता है। खेतों, झाड़ियों, नमी वाले स्थानों और घास के संपर्क में आने वाले ग्रामीणों तथा किसानों में इसके संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
तेज बुखार, असहनीय सिरदर्द, शरीर टूटना, कमजोरी और कुछ मामलों में त्वचा पर गहरे चकत्ते इसके प्रमुख लक्षण हैं। यदि समय पर इस बीमारी की पहचान कर उचित उपचार न दिया जाए, तो यह फेफड़ों, गुर्दे और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है।
आईसीएमआर की गाइडलाइन में प्राथमिक उपचार
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिकेट्सियल बीमारियों से संबंधित गाइडलाइन और ‘ट्रीटमेंट गाइडलाइंस फॉर एंटीमाइक्रोबियल यूज इन कॉमन सिंड्रोम्स’ के तहत स्क्रब टाइफस के लिए डॉक्सीसाइक्लिन (Doxycycline) को प्राथमिक और प्रभावी उपचार के रूप में चिन्हित किया गया है।
आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के अनुसार वयस्क मरीजों में डॉक्सीसाइक्लिन आधारित दवाएं सुझाई जाती हैं। अत्यधिक गंभीर स्थिति होने पर चिकित्सकीय देखरेख में अंतःशिरा (इंट्रावेनस) माध्यम से दवा दी जाती है। वहीं गर्भवती महिलाओं और विशेष चिकित्सीय स्थिति वाले मरीजों के लिए डॉक्टर अन्य वैकल्पिक दवाओं का चयन करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्थिति में स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए और खुराक का निर्धारण पंजीकृत चिकित्सक की सलाह पर ही होना चाहिए।
लक्षणों की अनदेखी न करने और लिवर जांच की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम में लगातार रहने वाले बुखार को साधारण फ्लू समझकर नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। यदि बुखार के साथ त्वचा या आंखों में पीलापन, सांस लेने में तकलीफ, लगातार उल्टियां, पेशाब की मात्रा में कमी या अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।
संक्रमण के दौरान लिवर पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए चिकित्सकों द्वारा लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कराने की सलाह दी जा रही है। यदि बिलीरुबिन का स्तर अत्यधिक बढ़ा हो, तो लिवर, पित्ताशय और पित्त नलियों की स्थिति जानने के लिए अल्ट्रासाउंड जांच भी कराई जा सकती है। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे खेतों और झाड़ीदार इलाकों में जाते समय शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें ताकि माइट के काटने से बचाव हो सके।