कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज, 45 वर्ष की उम्र से नियमित जांच कराना बेहद जरूरी

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Health News: कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया भर में तेजी से फैलने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल हो चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर इस बीमारी का सही समय पर पता चल जाए, तो इसका इलाज काफी आसान हो जाता है। शुरुआती चरण में नियमित जांच कराने से इस गंभीर स्थिति को समय रहते रोका जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों को नियमित रूप से स्क्रीनिंग करानी चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है या आंतों से जुड़ी बीमारियां हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर कम उम्र में ही जांच शुरू कर देनी चाहिए। इससे बीमारी का जोखिम घटता है।

मल में खून आना और थकान महसूस होना प्राथमिक लक्षण

इस कैंसर की शुरुआत बिना किसी बड़े संकेत के होती है। लोग शुरुआती लक्षणों को गैस या कब्ज समझकर अनदेखा कर देते हैं। मल में चमकीला लाल या गहरा काला खून दिखाई देना इसका प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा बिना किसी कारण शरीर में आयरन की कमी होने से लगातार थकान, कमजोरी और चक्कर आने की समस्या हो सकती है।

शौच की आदत में बदलाव और पेट दर्द से रहें सावधान

यदि कई हफ्तों तक मल त्याग का पैटर्न बदला रहे, तो यह चिंता का विषय है। बार-बार शौच जाना, लगातार कब्ज या दस्त रहना और मल का बहुत पतला होना इसके संकेत हैं। साथ ही पेट में लगातार दर्द, ऐंठन या गैस बनने की समस्या दवा लेने के बाद भी ठीक न हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बिना किसी डाइटिंग या एक्सरसाइज के अचानक तेजी से वजन कम होना भी आंतों की बीमारी का इशारा है। हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि इन लक्षणों का अर्थ हमेशा कैंसर ही नहीं होता। लेकिन समस्या बनी रहने पर कोलोनोस्कोपी जैसी जांच कराना जरूरी हो जाता है। समय पर स्क्रीनिंग से प्री-कैंसरस पॉलीप्स को हटाया जा सकता है।

Desh Raj
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