नाना पाटेकर के निधन के बाद कार्डियक अरेस्ट पर चर्चा तेज, जानिए हार्ट अटैक से यह कितना अलग और खतरनाक

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Panaji News: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद कार्डियक अरेस्ट की गंभीरता पर चर्चा तेज हो गई है। गोवा स्थित आवास पर 75 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने अचानक दिल की धड़कन रुकने और इसके लक्षणों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में होता है बड़ा अंतर

अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं। मेडिकल विज्ञान के अनुसार दोनों की प्रकृति अलग होती है। हार्ट अटैक तब आता है जब नसों में ब्लॉकेज से मांसपेशियों तक खून नहीं पहुंचता। इसके विपरीत कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है, जिससे रक्त प्रवाह तुरंत रुक जाता है।

हार्ट अटैक आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट का कारण जरूर बन सकता है। हालांकि दोनों का एक साथ होना जरूरी नहीं है। स्वस्थ दिखने वाले लोगों में भी कार्डियक अरेस्ट के छिपे हुए कारण हो सकते हैं। बाहरी रूप से फिट दिखने का मतलब यह कतई नहीं है कि हृदय का अंदरूनी सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है।

युवाओं में बढ़ता जोखिम और इसके प्रमुख कारण

कार्डियोमायोपैथी या लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम जैसी जन्मजात विकृतियां अचानक कार्डियक अरेस्ट ला सकती हैं। अत्यधिक तनाव, नींद की भारी कमी, धूम्रपान और जरूरत से ज्यादा शारीरिक श्रम इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसके अलावा खेलकूद के दौरान छाती पर अचानक लगने वाली तेज चोट भी दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को रोक सकती है।

सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य तेज धड़कन और चक्कर आने जैसे संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें। आपात स्थिति में तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं और मरीज को प्रति मिनट 100 से 120 बार की गति से सीपीआर दें। सार्वजनिक स्थानों पर उपलब्ध एईडी मशीन का बिजली का झटका धड़कन बहाल करने में मददगार होता है।

Desh Raj
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