National News: दशहरा सिर्फ रावण दहन का उत्सव नहीं, बल्कि मन की कमजोरियों और अहंकार से लड़ने का अवसर भी है। हर व्यक्ति के भीतर अच्छाई और बुराई का द्वंद्व चलता रहता है। हाल ही में टीवी कलाकारों मनीष वाधवा और समीक्षा जायसवाल ने अपने अंदर छिपी कमियों और उनसे निपटने के प्रयासों पर खुलकर बात की।
हस्तिनापुर के वीर सीरियल में भीष्म पितामह का रोल करने वाले मनीष वाधवा का मानना है कि इंसान गलतियों का पुतला है। क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या जैसी बुराइयां किसी में भी पनप सकती हैं। उन्होंने बताया कि काम की सफलता के बाद जब घमंड बढ़ता है, तब वह खुद को केवल अपने काम पर ध्यान देने की सीख देते हैं।
मन की सफाई और श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा
मनीष वाधवा ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के वचनों का हवाला देते हुए कहा कि हमें अपनी गलतियों पर लगातार नियंत्रण करना चाहिए। जैसे गंदे कपड़े धोए जाते हैं, वैसे ही मन में आने वाले बुरे विचारों को भी समय-समय पर साफ करना पड़ता है। दशहरा हर साल हमें इसी आत्मशुद्धि और संयम की नई प्रेरणा देता है।
अप्सरा धारावाहिक की अभिनेत्री समीक्षा जायसवाल के अनुसार दशहरा साहस और उम्मीद का प्रतीक है। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले उन्हें किसी बड़े प्रोजेक्ट से पहले अपनी क्षमताओं पर संदेह होता था। धीरे-धीरे उन्होंने लगातार तैयारी और अभ्यास के जरिए आत्मविश्वास हासिल किया और डर के आगे बढ़ना सीखा।
सफलता में टीम का योगदान और घमंड से दूरी
समीक्षा ने बताया कि लगातार तारीफ मिलने से व्यक्ति में यह भ्रम हो सकता है कि वह कभी गलत नहीं है। ऐसे में दूसरों की सही सलाह सुनना और अपनी गलती मानना बहुत आवश्यक है। स्क्रीन पर दिखने वाली सफलता के पीछे पूरी टीम की मेहनत होती है, यह सोच उन्हें हमेशा जमीन से जोड़े रखती है।
