कभी नहीं बनीं लीड हीरोइन, फिर भी हर किरदार से जीता दिल; ‘जूली’ से ‘निमकी मुखिया’ तक रीता भादुड़ी का यादगार सफर

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Delhi News: भारतीय सिनेमा और टेलीविजन की दिग्गज अदाकारा रीता भादुड़ी की जयंती पर कला जगत उनके शानदार अभिनय योगदान को याद कर रहा है। कभी मुख्य अभिनेत्री की भूमिका न मिलने के बावजूद उन्होंने मां, बहन, दोस्त और दादी के चरित्र किरदारों में ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि दर्शक आज भी उन्हें याद करते हैं। ‘जूली’, ‘राजा’ जैसी फिल्मों से लेकर ‘खिचड़ी’ और ‘निमकी मुखिया’ जैसे चर्चित धारावाहिकों तक उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा।

4 नवंबर 1955 को लखनऊ में जन्मीं रीता भादुड़ी को अभिनय की प्रेरणा अपनी मां चंद्रिमा भादुड़ी से मिली, जो स्वयं एक जानी-मानी अभिनेत्री थीं। रीता ने पुणे स्थित प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से अभिनय का औपचारिक प्रशिक्षण लिया। उन्होंने साल 1968 में फिल्म ‘तेरी तलाश में’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी।

‘जूली’ से मिली पहचान, रीजनल सिनेमा में भी दिखाई चमक

साल 1975 में आई मशहूर फिल्म ‘जूली’ में उन्होंने मुख्य किरदार की सहेली की भूमिका निभाई। फिल्म का लोकप्रिय गीत ‘ये रातें नई पुरानी’ उन पर ही फिल्माया गया था, जिसने कम समय के स्क्रीन स्पेस में भी दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसके बाद उन्होंने ‘सावन को आने दो’, ‘विश्वनाथ’, ‘अनुरोध’, ‘अंखियों के झरोखों से’, ‘किताब’ और ‘गोपाल कृष्ण’ जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया।

हिंदी सिनेमा के अलावा उन्होंने गुजराती और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा में भी उत्कृष्ट कार्य किया। उन्होंने मलयालम फिल्म ‘कन्याकुमारी’ में अभिनेता कमल हासन के साथ भी अहम भूमिका निभाई थी।

90 के दशक में जीता फिल्मफेयर अवॉर्ड

1990 के दशक में रीता भादुड़ी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों का हिस्सा बनीं। उन्होंने ‘बेटा’, ‘हीरो नंबर 1’, ‘कभी हां कभी ना’, ‘तमन्ना’, ‘क्या कहना’ और ‘दिल विल प्यार व्यार’ जैसी फिल्मों में सशक्त अभिनय किया। 1995 में रिलीज हुई फिल्म ‘राजा’ में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री (Best Supporting Actress) पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

टीवी की दुनिया में बनीं हर घर का चेहरा

फिल्मों के साथ-साथ रीता भादुड़ी ने टेलीविजन जगत में भी अपनी खास पहचान बनाई। तीन दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने 30 से अधिक टीवी धारावाहिकों में काम किया। इनमें ‘अमानत’, ‘हसरतें’, ‘एक महल हो सपनों का’, ‘कुमकुम’, ‘छोटी बहू’, ‘खिचड़ी’ और ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ जैसे धारावाहिक शामिल रहे।

कॉमेडी से लेकर पारिवारिक ड्रामा तक, उन्होंने हर तरह की भूमिकाओं को सहजता से निभाया। उनके अंतिम चर्चित किरदारों में धारावाहिक ‘निमकी मुखिया’ की ‘इमरती देवी’ का रोल शामिल था। रीता भादुड़ी ने साल 2017 में रिलीज हुई गुजराती फिल्म ‘तंबूरो’ में भी अभिनय किया। 17 जुलाई 2018 को 62 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन 70 से अधिक फिल्मों और 30 से ज्यादा टीवी धारावाहिकों के जरिए उनके निभाए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं।

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