New Delhi: निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण: पार्ट वन’ 5 नवंबर 2026 को दिवाली के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। नमित मल्होत्रा द्वारा निर्मित और लगभग 4000 करोड़ रुपये के भव्य बजट में दो भागों में तैयार की गई इस महागाथा का पहला भाग देव-दानव युद्ध से लेकर राम जन्म तक के प्रसंगों को आधुनिक और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करता है।
भारतीय सिनेमा में वर्ष 1917 में दादासाहेब फाल्के की मूक फिल्म ‘लंका दहन’ से लेकर अब तक रामायण के कई रूपांतरण पर्दे पर उतारे जा चुके हैं। वर्ष 2026 में यह सिनेमाई सफर अपने सबसे आधुनिक और भव्य स्तर पर पहुंच चुका है। निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण: पार्ट वन’ दिवाली के पावन पर्व पर बड़े पर्दे पर दस्तक दे रही है, जिसे भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
निर्माता नमित मल्होत्रा के नेतृत्व में करीब 4000 करोड़ रुपये के कुल बजट से दो हिस्सों में बनाई गई इस महागाथा का पहला भाग अब दर्शकों के सामने है।
फिल्म की 10 प्रमुख विशेषताएं
- सिनेमाई इतिहास का विस्तार: वर्ष 1917 की मूक फिल्म ‘लंका दहन’ के बाद से भारतीय सिनेमा में रामायण के कई रूपांतरण आए, लेकिन यह संस्करण तकनीकी और विजुअल दृष्टि से सबसे आधुनिक स्तर पर तैयार किया गया है।
- भव्य बजट: दो भागों में बन रही इस पूरी परियोजना का बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये है, जो इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है।
- कहानी का दायरा: फिल्म का पहला भाग मुख्य रूप से पौराणिक देव-दानव युद्ध की पृष्ठभूमि से लेकर भगवान श्री राम के जन्म तक के महत्वपूर्ण प्रसंगों को विस्तार से समेटता है।
- नितेश तिवारी का निर्देशन: कहानी के भावनात्मक पहलुओं और चरित्र-चित्रण को संतुलित रखते हुए निर्देशक नितेश तिवारी ने इस महागाथा को नए दृष्टिकोण के साथ पेश किया है।
- नमित मल्होत्रा का विजन: विश्वस्तरीय विजुअल इफेक्ट्स (VFX) और उच्च प्रोडक्शन वैल्यू के साथ फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा द्वारा किया गया है।
- तकनीकी उत्कृष्टता: फिल्म में पौराणिक युग के परिवेश और युद्ध दृश्यों को सजीव रूप देने के लिए अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय तकनीकों का उपयोग किया गया है।
- पहला भाग अब रिलीज: दो हिस्सों में विभाजित इस विस्तृत कहानी का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को दिवाली के मौके पर सीधे सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच पहुंच रहा है।
- पौराणिक पृष्ठभूमि का प्रस्तुतीकरण: देव और दानवों के बीच संघर्ष के दृश्यों को बेहद प्रभावशाली और भव्य तरीके से दर्शाया गया है, जो मुख्य कथा का आधार तैयार करता है।
- सांस्कृतिक और आधुनिक संतुलन: प्राचीन भारतीय इतिहास और आस्था से जुड़े इस विषय को पारंपरिक गरिमा बनाए रखते हुए आधुनिक सिनेमाई तकनीक के साथ प्रस्तुत किया गया है।
- उद्योग के लिए नया मानक: यह फिल्म भारतीय फिल्म निर्माण की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े बजट की पौराणिक फिल्मों के निर्माण के लिए एक नया मानक स्थापित करती है।